पति की शहादत के बाद वही वर्दी पहनकर बिलासपुर में दे रहीं सेवा, कहा– ‘देश सबसे पहले है’
रायपुर/बिलासपुर। शहादत सिर्फ एक घटना नहीं होती, वह एक ऐसी विरासत होती है जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है शहीद सब इंस्पेक्टर दीपक भारद्वाज और उनकी पत्नी प्रान्तिका भारद्वाज की, जिन्होंने अपने पति के बलिदान को ही अपने जीवन का संकल्प बना लिया है।
सब इंस्पेक्टर दीपक भारद्वाज ने राष्ट्रसेवा और समाज की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। उनकी शहादत ने जहां परिवार को गहरा दुख दिया, वहीं पूरे देश को उन पर गर्व भी है। पति की शहादत के बाद उनकी पत्नी प्रान्तिका भारद्वाज ने हार नहीं मानी, बल्कि वही वर्दी पहनकर पुलिस सेवा में कदम रखा और आज बिलासपुर में ड्यूटी निभा रही हैं।

प्रान्तिका भारद्वाज कहती हैं कि उनके पति हमेशा कहा करते थे—“देश सबसे पहले है।” उन्होंने अपने जीवन से इस वाक्य को सच कर दिखाया। उनका कहना है कि जब भी वे वर्दी पहनती हैं, तो उन्हें ऐसा लगता है जैसे दीपक उनके साथ खड़े हैं और उनका हौसला बढ़ा रहे हैं।
वे मानती हैं कि शहीद की पत्नी होना दर्द और गर्व दोनों का अहसास कराता है। पति की कमी हर पल महसूस होती है, लेकिन उनके आदर्श और साहस ही उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देते हैं। उनका कहना है कि यह नौकरी उनके लिए सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि पति के अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प है।
प्रान्तिका भारद्वाज ने इस अवसर पर सभी शहीदों को नमन करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और सम्मान के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों का बलिदान ही भारत की असली ताकत है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे देशभक्ति, सेवा और त्याग को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, यही शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
आज जब लोग कहते हैं कि “जो वर्दी कभी दीपक भारद्वाज पर चमकती थी, आज वही उनकी पत्नी के कंधों पर गर्व से सजी है”, तो यह दृश्य हर किसी को भावुक कर देता है। यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि साहस, बलिदान और कर्तव्य की ऐसी मिसाल है जो समाज को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।
