गरियाबंद। सरकारी योजनाओं और विकास के दावों के बीच गरियाबंद जिले के मैनपुर नगर से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने लोगों को हैरान भी किया है और प्रेरित भी। यहां स्टापडेम मोहल्ले में पिछले करीब 20 वर्षों से पुल निर्माण की मांग अधूरी पड़ी थी। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जब समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो एक ग्रामीण ने खुद जिम्मेदारी उठाते हुए अपने निजी खर्च से पुल का निर्माण करा दिया।
स्टापडेम मोहल्ले के निवासी और मुर्गा व्यवसायी लोचन चक्रधारी ने करीब 10 से 12 लाख रुपये खर्च कर पुल बनवाया है। इसके लिए उन्होंने कर्ज तक लिया, लेकिन मोहल्ले के लोगों की परेशानी दूर करने का संकल्प नहीं छोड़ा। उनकी इस पहल की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।
दरअसल, स्टापडेम मोहल्ले के करीब 30 से 35 परिवार वर्षों से आवागमन की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे। मोहल्ले के पास स्थित नाला बारिश के दिनों में उफान पर आ जाता था, जिससे लोगों का दूसरे हिस्सों से संपर्क लगभग कट जाता था। बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती थी, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में जोखिम उठाना पड़ता था और गर्भवती महिलाओं सहित बुजुर्गों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।
ग्रामीणों के अनुसार, पुल निर्माण के लिए कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की गई। आवेदन दिए गए, अधिकारियों के चक्कर लगाए गए और चुनावी दौर में भी यह मुद्दा उठाया जाता रहा। हर बार आश्वासन तो मिले, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं हुआ। नतीजा यह रहा कि दो दशक बीत जाने के बाद भी मोहल्ले के लोगों की समस्या जस की तस बनी रही।
इसी बीच लोचन चक्रधारी ने लोगों की परेशानी को देखते हुए खुद पहल करने का फैसला किया। उन्होंने अपने स्तर पर पुल निर्माण की योजना बनाई और निजी संसाधनों से काम शुरू कराया। आर्थिक रूप से यह आसान नहीं था, इसलिए उन्होंने कर्ज लेकर निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया। उनका कहना है कि वर्षों से लोग परेशानी झेल रहे थे और अब इंतजार करना उचित नहीं लगा।
लोचन चक्रधारी बताते हैं कि उनका उद्देश्य किसी तरह की प्रसिद्धि हासिल करना नहीं, बल्कि लोगों को राहत पहुंचाना था। उन्होंने कहा कि जब जिम्मेदार संस्थाओं से उम्मीद टूटने लगी, तब उन्होंने अपने सामर्थ्य के अनुसार समाधान निकालने का प्रयास किया। आज पुल का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और आगामी बारिश में इसका लाभ सीधे मोहल्ले के परिवारों को मिलेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने से उनकी वर्षों पुरानी समस्या खत्म हो जाएगी। अब बारिश के मौसम में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी, मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा और लोगों को जान जोखिम में डालकर नाला पार नहीं करना पड़ेगा।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि निर्माण कार्य के दौरान तकनीकी मार्गदर्शन के लिए अधिकारियों से संपर्क किया गया था, लेकिन कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इसके बावजूद लोचन चक्रधारी ने काम नहीं रोका और अपने प्रयासों से पुल निर्माण को अंतिम चरण तक पहुंचाया।
लोचन चक्रधारी की इस पहल को क्षेत्र के लोग जनसेवा की मिसाल मान रहे हैं। उनका कहना है कि जो काम 20 साल में सरकारी तंत्र नहीं कर पाया, उसे एक आम नागरिक ने अपने संकल्प और सामाजिक जिम्मेदारी के बल पर पूरा कर दिखाया। यही वजह है कि अब ग्रामीण जिला प्रशासन से लोचन चक्रधारी को सम्मानित करने की मांग कर रहे हैं।
मैनपुर के स्टापडेम मोहल्ले में बना यह पुल केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के संकल्प और समाज के प्रति समर्पण का प्रतीक बन गया है, जिसने दूसरों की सुविधा के लिए अपनी मेहनत की कमाई और कर्ज के पैसे तक लगा दिए। यह पहल बताती है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो एक व्यक्ति भी पूरे समाज के लिए बदलाव की बड़ी वजह बन सकता है।
