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अवैध खनन पर साय सरकार का बड़ा प्रहार, जुर्माना बढ़ा, कार्रवाई हुई सख्त


रायपुर, 24 जून। छत्तीसगढ़ में अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ अब पहले से अधिक कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर राज्य सरकार ने गौण खनिज नियमों में व्यापक संशोधन किया है। मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद नए नियम लागू कर दिए गए हैं। सरकार का दावा है कि इससे अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगेगी, राजस्व में वृद्धि होगी और खनिज संसाधनों का पारदर्शी एवं वैज्ञानिक उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।


नए नियमों के तहत अवैध खनिज परिवहन और उत्खनन के मामलों में न्यूनतम प्रशमन शुल्क 25 हजार रुपये निर्धारित किया गया है। इसके अलावा अवैध परिवहन के मामलों में प्रति टन दो हजार रुपये की दर से शुल्क वसूला जाएगा तथा खनिज का पूरा मूल्य भी अलग से देना होगा। उदाहरण के तौर पर 35 टन खनिज के अवैध परिवहन पर 70 हजार रुपये प्रशमन शुल्क के साथ खनिज का मूल्य भी वसूला जाएगा। ट्रैक्टर से अवैध रेत परिवहन करने पर भी न्यूनतम 25 हजार रुपये का दंड और रेत का मूल्य देना अनिवार्य होगा।


सरकार ने अवैध खनन में प्रयुक्त वाहनों के खिलाफ भी सख्ती बढ़ाई है। अब जब्त वाहन, मशीन या अन्य सामग्री की सुपुर्दगी से पहले संबंधित न्यायालय में वाहन के प्रकार के अनुसार 50 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी।


विकास कार्यों को गति देने के लिए शासकीय निर्माण कार्यों हेतु उत्खनन क्षेत्र की सीमा एक हेक्टेयर से बढ़ाकर दो हेक्टेयर कर दी गई है, जबकि अनुज्ञापत्र की अवधि दो वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दी गई है। इससे निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित होने की उम्मीद है।


खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक अन्वेषण के लिए राज्य सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ राज्य खनिज अन्वेषण न्यास-2025’ की स्थापना की है। गौण खनिजों से प्राप्त रॉयल्टी का दो प्रतिशत इस न्यास में जमा होगा, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 5.25 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्राप्त होने का अनुमान है।
सरकार ने खनन पट्टों के समामेलन की प्रक्रिया को भी सरल बनाया है। साथ ही सभी निर्माण विभागों में रॉयल्टी, डीएमएफ, पर्यावरण उपकर और अधोसंरचना उपकर की कटौती की व्यवस्था को एक समान किया गया है। इससे अवैध स्रोतों से खनिजों के उपयोग पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।


एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत अब जिला पंचायतों को भी गौण खनिज राजस्व में हिस्सा मिलेगा। वहीं करीब 30 वर्षों बाद खदानों के डेड रेंट (अनिवार्य भाटक) की दरों में वृद्धि की गई है। सरकार का मानना है कि इससे केवल गंभीर पट्टाधारी ही खदानों का संचालन करेंगे और बंद पड़ी खदानें पुनः नीलामी के लिए उपलब्ध हो सकेंगी।


राज्य सरकार ने इन बदलावों को अवैध खनन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा बताते हुए कहा है कि नए नियमों से राजस्व वृद्धि, पारदर्शिता और खनिज संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।

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