रायपुर, 24 जून। प्रदेश सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग में एक बड़ा प्रशासनिक सुधार करते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के लिए साड़ी की केंद्रीकृत खरीदी व्यवस्था समाप्त कर दी है। अब साड़ी खरीदी के लिए निर्धारित राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जाएगी। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने यह निर्णय विभागीय व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से लिया है।
सरकार के अनुसार हाल के दिनों में साड़ी खरीदी प्रक्रिया को लेकर सामने आए विभिन्न मुद्दों, समाचारों और सुझावों के परीक्षण के बाद यह फैसला लिया गया। नई व्यवस्था लागू होने से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपनी पसंद एवं आवश्यकता के अनुरूप साड़ी का चयन कर सकेंगी।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) की सोच के अनुरूप शासन की राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में पारदर्शी और तकनीक आधारित प्रशासनिक सुधारों को बढ़ावा दिया जा रहा है और विभाग का यह निर्णय उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि साड़ी का रंग और डिजाइन विभागीय स्तर पर निर्धारित किया जाए तथा अंतिम स्वरूप आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से परामर्श के बाद तय किया जाए। साड़ी संबंधी जानकारी विभाग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि पूरे प्रदेश में एकरूपता बनी रहे। वहीं कपड़े के प्रकार जैसे कॉटन, सिंथेटिक या अन्य विकल्पों का चयन स्थानीय स्तर पर स्वयं कार्यकर्ता और सहायिकाएं कर सकेंगी।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की बाल विकास सेवा योजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को प्रतिवर्ष दो यूनिफॉर्म प्रदान करने का प्रावधान है, जिसके लिए प्रति यूनिफॉर्म अधिकतम 500 रुपये निर्धारित हैं। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि हितग्राहियों को अपनी पसंद के अनुसार चयन का अधिकार भी मिलेगा और शासन की राशि सीधे पात्र व्यक्तियों तक पहुंचेगी।
