हटकेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी सुरेश गिरी ने श्रद्धालुओं से कहा- खारून का प्रदूषित जल भगवान शिव पर न चढ़ाएं, घर से स्वच्छ जल लेकर आएं; विधानसभा तक गूंज चुका है नदी प्रदूषण का मामला
रायपुर। सावन के पवित्र महीने में जब लाखों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने की तैयारी कर रहे हैं, तब राजधानी रायपुर से एक ऐसी अपील सामने आई है जिसने आस्था के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खारून नदी तट स्थित प्रसिद्ध हटकेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी सुरेश गिरी महाराज ने श्रद्धालुओं से खारून नदी का पानी जलाभिषेक में उपयोग नहीं करने की अपील की है।
पुजारी का कहना है कि खारून नदी का पानी अब इतना प्रदूषित हो चुका है कि उसे भगवान शिव पर अर्पित करना उचित नहीं है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे अपने घरों से स्वच्छ जल लेकर आएं और उसी से भोलेनाथ का अभिषेक करें।
यह अपील केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि राजधानी की सबसे महत्वपूर्ण नदी की बदहाल स्थिति को भी उजागर करती है। जिस खारून को रायपुर की जीवनरेखा कहा जाता है, वही आज शहर के सीवरेज, नालों और औद्योगिक अपशिष्ट का बोझ ढो रही है। कई स्थानों पर बिना उपचारित गंदा पानी सीधे नदी में गिर रहा है, जिससे नदी का जल प्रदूषित हो चुका है।
खारून की दुर्दशा का मुद्दा विधानसभा तक भी पहुंच चुका है। मानसून सत्र के दौरान भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने सरकार से सवाल पूछा था कि खारून नदी आखिर कब साफ होगी और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी। विपक्ष भी लगातार नदी प्रदूषण को लेकर सरकार पर हमलावर रहा है।
धार्मिक नगरी में सावन के दौरान यदि मंदिर के पुजारी को श्रद्धालुओं से यह कहना पड़े कि नदी का पानी भगवान पर न चढ़ाएं, तो यह केवल एक अपील नहीं बल्कि राजधानी की पर्यावरणीय विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण माना जा रहा है। अब सवाल यह है कि आखिर खारून को फिर से निर्मल बनाने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे।
