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छत्तीसगढ़ में 83.36 लाख परिवारों को खाद्य सुरक्षा, 87% आबादी को मिल रहा सीधा लाभ – मंत्री दयालदास

​• सार्वजनिक वितरण प्रणाली का विस्तार: 2.73 करोड़ लोगों को रियायती व नि:शुल्क खाद्यान्न

​• 3100 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदी और ‘अन्नपूर्णा ग्रेन एटीएम’ से सुधरेगी व्यवस्था

रायपुर, 18 अगस्त। छत्तीसगढ़ में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करने के साथ किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने और उपभोक्ता हितों के संरक्षण की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। विभाग के अनुसार जनवरी 2024 में जहां प्रदेश में करीब 77 लाख राशनकार्ड प्रचलित थे और 2.69 करोड़ लोगों को रियायती दर पर चावल मिल रहा था, वहीं अब राशनकार्डों की संख्या बढ़कर 83.36 लाख हो गई है। इनमें 2.73 करोड़ सदस्य पंजीकृत हैं। इस तरह राज्य की अनुमानित आबादी के करीब 87 प्रतिशत हिस्से को खाद्य सुरक्षा का लाभ मिल रहा है।

पिछले तीन वर्षों में करीब 10.44 लाख नए राशनकार्ड जारी किए गए और 16.93 लाख नए सदस्यों को राशनकार्डों में जोड़ा गया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत प्रदेश में 14,182 शासकीय उचित मूल्य दुकानें संचालित हैं। हितग्राहियों को आसानी से और समय पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए पिछले तीन वर्षों में 445 नई उचित मूल्य दुकानों का आबंटन किया गया है।

74.89 लाख टन चावल का वितरण

खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के तहत अंत्योदय, प्राथमिकता, निराश्रित और दिव्यांग परिवारों को पात्रता के अनुसार चावल नि:शुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि सामान्य श्रेणी के परिवारों को 10 रुपये प्रति किलो की उपभोक्ता दर से चावल दिया जा रहा है। जनवरी 2024 से जुलाई 2026 तक राशनकार्डधारियों को 74.89 लाख टन चावल वितरित किया गया।

बस्तर संभाग में आयरन की कमी दूर करने के उद्देश्य से 7.97 लाख राशनकार्डधारी परिवारों को हर महीने दो किलो गुड़ 17 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर दिया जा रहा है। जनवरी 2024 से जुलाई 2026 तक 26,723 टन गुड़ वितरित किया गया। अनुसूचित और माओवाद प्रभावित क्षेत्रों के अंत्योदय एवं प्राथमिकता परिवारों को प्रोटीन की कमी दूर करने के लिए पांच रुपये प्रति किलो की दर से हर महीने दो किलो चना दिया जा रहा है। करीब 31.64 लाख परिवार इसका लाभ ले रहे हैं और उक्त अवधि में 1.43 लाख टन चना वितरित किया गया।

इसी तरह आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए 74.46 लाख राशनकार्डधारी परिवारों को आयोडीनयुक्त नमक उपलब्ध कराया जा रहा है। जनवरी 2024 से जुलाई 2026 तक 2.69 लाख टन नमक वितरित किया गया। अंत्योदय और प्राथमिकता परिवारों को 17 रुपये प्रति किलो की दर से प्रति माह एक किलो शक्कर भी दी जा रही है। इस अवधि में 1.95 लाख टन शक्कर का वितरण हुआ।

अब राशन के लिए लाइन नहीं, 24 घंटे मिलेगा अनाज

छत्तीसगढ़ में पीडीएस को डिजिटल बनाने की दिशा में अन्नपूर्णा ग्रेन एटीएम की शुरुआत की गई है। प्रदेश के पहले तीन ग्रेन एटीएम रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में 8 अगस्त 2026 से संचालित हैं। हितग्राही राशनकार्ड नंबर या आधार नंबर दर्ज कर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के बाद अपनी सुविधा के अनुसार 24 घंटे चावल प्राप्त कर सकते हैं। इससे उचित मूल्य दुकानों पर लाइन लगाने की परेशानी कम होगी और हितग्राहियों को सुविधानुसार खाद्यान्न लेने की सुविधा मिलेगी।

सात शहरों तक पहुंचेगी सिटी गैस व्यवस्था

राज्य में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इसके तहत पाइपलाइन के माध्यम से घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक पीएनजी तथा वाहनों के लिए सीएनजी उपलब्ध कराने की योजना है। रायपुर और महेंद्रगढ़ के कुछ घरों में पीएनजी आपूर्ति शुरू हो चुकी है। आगामी छह माह में सात अन्य शहरों में इसका विस्तार प्रस्तावित है। वर्ष 2030 तक प्रदेश के 42 लाख घरों को इस व्यवस्था से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

धान खरीदी में किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल

किसानों के हित में धान खरीदी की सीमा 15 क्विंटल प्रति एकड़ से बढ़ाकर 21 क्विंटल प्रति एकड़ की गई है। धान की राशि 2300 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 3100 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने का उल्लेख विभाग ने किया है। विभाग के अनुसार करीब 25 लाख किसानों को समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का लाभ मिल रहा है।

खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में 2,739 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 25.49 लाख किसानों से रिकॉर्ड 149.25 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। वहीं खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 2,740 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 25.24 लाख किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई। वर्ष 2025-26 में किसानों को समर्थन मूल्य और कृषक उन्नति योजना के तहत कुल 43,723 करोड़ रुपये अंतरित किए गए।

धान खरीदी की राशि खरीदी के 48 घंटे के भीतर किसानों के खातों में ऑनलाइन स्थानांतरित करने की व्यवस्था की गई। सभी उपार्जन केंद्रों पर पारदर्शी टोकन प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन और नमी मापक यंत्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। बायोमेट्रिक डिवाइस और आधार सत्यापन से फर्जी धान उपार्जन पर नियंत्रण का प्रयास किया गया है।

विभाग के अनुसार डिजिटल निगरानी और सुधारात्मक उपायों से फर्जी पंजीयन, दूसरे राज्यों से धान की आवक, बिचौलियों की भूमिका और अवैध री-साइक्लिंग पर नियंत्रण हुआ है तथा शासन को करीब 4,000 करोड़ रुपये की प्रत्यक्ष बचत हुई है। खरीफ वर्ष 2026-27 के लिए किसान पंजीयन 1 जुलाई से 31 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित है। पिछले वर्ष पंजीकृत एग्रीस्टैक आईडी वाले किसानों को धान बिक्री के लिए दोबारा पंजीयन से छूट देने की व्यवस्था की गई है।

भंडारण क्षमता बढ़ाने पर जोर

पिछले तीन वर्षों में 27 जिलों के 55 स्थानों पर 2.94 लाख मीट्रिक टन क्षमता के नए गोदामों का निर्माण पूरा किया गया है। वहीं आठ जिलों के 13 स्थानों पर 89,088 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम निर्माणाधीन हैं। आगामी दो वर्षों में राज्य भंडार गृह निगम के माध्यम से 2.71 लाख टन क्षमता के नए गोदाम बनाने की योजना है। इसके अलावा पीईजी योजना के तहत 3.5 लाख टन क्षमता के नए गोदाम प्रस्तावित हैं।

उपभोक्ता आयोगों में 84 फीसदी मामलों का निपटारा

उपभोक्ता विवादों के त्वरित निपटारे के लिए डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा दिया गया है। छत्तीसगढ़ में ई-हियरिंग सेवा शुरू की गई है और यह सुविधा 18 जिलों में उपलब्ध है। अक्टूबर 2023 से जुलाई 2026 के बीच राज्य उपभोक्ता आयोग को प्राप्त 2,058 शिकायतों में से 1,720 मामलों का निराकरण किया गया, जिससे करीब 84 प्रतिशत निपटारा दर रही। इसी अवधि में जिला उपभोक्ता आयोगों ने 10,891 मामलों का निपटारा किया।

उपभोक्ताओं को क्षतिपूर्ति दिलाने के मामले में भी महत्वपूर्ण प्रगति का दावा किया गया है। अक्टूबर 2023 से जुलाई 2026 के दौरान शिकायतों में 16.88 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति निर्धारित की गई, जिसमें से 16.02 करोड़ रुपये प्रभावित पक्षकारों को भुगतान किए जा चुके हैं। बेमेतरा में नया जिला उपभोक्ता आयोग और रायपुर में अतिरिक्त उपभोक्ता बेंच भी शुरू की गई है।

अगले दो वर्षों में स्मार्ट पीडीएस और हर जिले में ग्रेन एटीएम

विभाग की आगामी कार्ययोजना में स्मार्ट पीडीएस योजना लागू करना प्रमुख है। इसके तहत राशनकार्ड प्रबंधन, सप्लाई चेन और खाद्यान्न वितरण सहित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के सभी चरणों को केंद्रीयकृत ऑनलाइन व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। नेटवर्क विहीन ग्रामीण क्षेत्रों की 704 उचित मूल्य दुकानों को ऑनलाइन करने के लिए दूरसंचार विभाग के साथ समन्वय कर नेटवर्क समस्या दूर करने की योजना है।

रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर की तर्ज पर अन्य जिलों में भी ग्रेन एटीएम स्थापित करने की योजना है। इसके अलावा आगामी दो वर्षों में 12 जिलों में पीएनजी गैस उपलब्ध कराने के लिए पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार की कार्ययोजना तैयार की गई है।

इस तरह खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने पीडीएस में खाद्य सुरक्षा के विस्तार के साथ डिजिटल तकनीक, धान खरीदी में पारदर्शिता, भंडारण क्षमता, उपभोक्ता अधिकारों और गैस वितरण व्यवस्था को अगले चरण में ले जाने की रूपरेखा प्रस्तुत की है।

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