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850 गांवों तक पहुंची पहली नियमित बस सेवा, एक साल में 24 लाख किमी दौड़ीं बसें

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का एक वर्ष पूरा, 13 जिलों के 106 मार्गों पर 107 बसों का संचालन; दूसरे चरण में 4368 गांवों को जोड़ने की तैयारी

रायपुर, 3 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचलों और दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए नियमित यात्री परिवहन की सुविधा अब नई राह खोल रही है। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ने एक वर्ष का सफर पूरा कर लिया है। इस दौरान बस्तर और सरगुजा संभाग के 13 जिलों के 106 मार्गों पर 107 बसों का संचालन शुरू हुआ है। इन बसों के माध्यम से ऐसे 850 गांवों तक पहली बार नियमित बस सेवा पहुंची है, जहां पहले ग्रामीणों को आवागमन के लिए पिकअप और अन्य मालवाहक वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता था।

4 अक्टूबर 2025 को जगदलपुर से शुरू हुई इस योजना की बसों ने एक साल में करीब 24 लाख किलोमीटर का सफर तय किया है। वर्तमान में बसें प्रतिदिन लगभग 17,500 किलोमीटर चल रही हैं। योजना की शुरुआत 34 मार्गों पर 34 बसों और करीब 250 गांवों को जोड़ने के लक्ष्य के साथ हुई थी। एक वर्ष में इसका दायरा बढ़कर 106 मार्गों और 850 गांवों तक पहुंच गया है।

योजना का सबसे अधिक लाभ बस्तर और सरगुजा के दूरस्थ आदिवासी अंचलों को मिला है। नियमित बस सेवा शुरू होने से ग्रामीणों के लिए स्कूल, अस्पताल, हाट-बाजार, ब्लॉक और जिला मुख्यालय तक पहुंचना आसान हुआ है। महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और मरीज अब अपेक्षाकृत सुरक्षित तरीके से यात्रा कर पा रहे हैं। वहीं ग्रामीण आम, महुआ और अन्य वनोपज को बाजार तक पहुंचाकर उसी दिन गांव लौटने में भी सक्षम हुए हैं। इससे स्थानीय व्यापार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिली है।

बस्तर संभाग में 51 मार्गों पर 50 बसें तथा सरगुजा संभाग में 55 मार्गों पर 57 बसें संचालित की जा रही हैं। कम यात्री संख्या वाले दुर्गम मार्गों पर बस सेवा जारी रखने के लिए राज्य सरकार संचालकों को प्रति किलोमीटर वित्तीय सहायता दे रही है। पहले वर्ष 26 रुपये, दूसरे वर्ष 24 रुपये और तीसरे वर्ष 22 रुपये प्रति किलोमीटर सहायता का प्रावधान है। अब तक बस संचालकों को कुल 5.77 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है।

बसों की नियमितता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए GPS और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) से निगरानी की जा रही है। बसों की लाइव लोकेशन, ट्रिप और स्टॉपेज की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध है। यात्रियों की सुविधा के लिए समय-सारिणी बस संगवारी ऐप पर भी उपलब्ध कराई जा रही है।

योजना के दूसरे चरण में आठ नए जिलों के अनुसूचित क्षेत्रों के 85 आदिवासी विकासखंडों को जोड़ने की तैयारी है। इसमें मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, बालोद, गरियाबंद, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, रायगढ़, कोरबा और धमतरी जिले शामिल हैं। इन जिलों के 4368 बस सुविधा विहीन गांवों तक परिवहन सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य है। इससे करीब 14.57 लाख लोगों को लाभ मिलने की संभावना है। दूसरे चरण में 60 से 80 बसों का संचालन प्रस्तावित है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने योजना के एक वर्ष पूरे होने पर कहा कि सरकार का लक्ष्य अंतिम छोर पर बसे गांवों तक सुरक्षित और सुलभ परिवहन पहुंचाना है। परिवहन सुविधा केवल शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार तक पहुंचने का समान अवसर मिलना चाहिए।



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