“देव जतरा” महोत्सव के लिए प्रशासन तैयार, श्रद्धालुओं के लिए पेयजल एवं भोजन की पुख्ता व्यवस्था

रिपोर्ट – सुनील यादव
कोण्डागांव / जिला कांकेर के वल्लेकनार्र सेमरगांव (आमाबेडा) में कुपार लिंगो की स्मृति में शुरू हो रहे तीन दिवसीय (29 मार्च से 31 मार्च तक) देव जतरा महोत्सव में शामिल होने के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं हेतु जिला प्रशासन कोण्डागांव द्वारा कांकेर सीमा पर स्थित ग्राम ईरागांव में पेयजल, निःशुल्क भोजन, चिकित्सा के अलावा विश्राम की व्यवस्था की गई है।

इस क्रम में जिला कलेक्टर नीलकंठ टीकाम ने दिनांक 29 मार्च को ईरागांव पहुंचकर व्यवस्था का जायजा लेते हुए ग्रामीणों से भेंट किया गया। इसके साथ ही जिला प्रशासन की पहल से पहली बार केशकाल, फरसगांव के अलावा मुख्यालय कोण्डागांव से भी निःशुल्क बस श्रद्धालुओं के लिए चलाई जा रही है। मौके पर महिला बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी जाने वाले बच्चो को निःशुल्क गणवेश प्रदाय किया गया है।

उल्लेखनीय है कि पारी कुपार लिंगो गोंड आदिवासियों के जनक माने जाते हैं। इसका जिक्र नेताम वंश के राजाओं के किले में मिले शिलालेख में भी किया गया हैं। पहांदी पारी कुपार लिंगो कर्रसाड़ व देव जतरा प्रत्येक तीन वर्ष के बाद आयोजित किया जाता है। हालांकि आदिवासी बुजुर्ग बताते हैं 50 वर्ष पूर्व यह जतरा 12 साल में एक बार होता था। इसके पीछे मान्यता यह थी कि 12 साल बाद बांस के फूल खिलते थे, जो बारिश नहीं होने का प्रतीक था। लोग बरसात के लिए जतरा निकालते थे। बुजुर्ग यह भी मानते हैं कि जतरा की तिथि का निर्धारण आंगा पेन (स्थानीय देवताओं) की अनुमति से चन्द्रमा को देखकर किया जाता है।

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