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चिरीमिरी स्थाईत्व व नविन उद्द्योग हेतु आमरण अनशन पर बैठे सुभाष देवनाथ

कोरिया / चिरीमिरी – जिले के कोयलांचल क्षेत्र चिरिमिरी में स्थाईत्व का मुद्दा गहराने लगा है, लोगों के जहन में सिर्फ एक ही बात है की किसी तरह से चिरिमिरी की बसाहट बरकरार रहे। यहाँ नई कोयला खदाने खुले नविन उद्द्योग – धंदे डले, लोगों को काम का अवसर मिले और किसी तरह चिरीमिरी बसे रहे लोगों को यहाँ से गुजर – बसर के लिय किसी और शहर का रुख न करना पड़े, पर ऐसा हो नहीं रहा ?जिसे देखते हुए चिरीमिरी हल्दीबाड़ी के सुभाष देवनाथ ने आज से आमरण अनशन पर जाने का फैसला लिया, इन्हें ऐसा लगता है की यही एक रास्ता है जिससे स्थानीय लोगों तक और शासन – प्रशासन तक बात पहुचाई जा सकती है।
             ज्ञात हो की आमरण अनशन पर बैठे सुभाष देवनाथ का कहना है की उनका यह इलाका बेहद पिछड़ा है छोटी -मोटी सुविधओं के लिए भी इन्हें काफी परेशान होना पड़ता है, शिक्षा- स्वास्थ्य – रोजगार और स्थायी आवास जैसे मुद्दों को पूरा नहीं कर पाने में स्थानीय महापौर, विधायक और सांसद जिम्मेदार है। आकड़ो पर नजर डाले तो बीते दो सालों में एसईसीएल चिरमिरी से ही सबसे अधिक श्रमिक रिटायर हुए है, साल 2016 में 1200 कॉलरी श्रमिक सेवानिवृत्त हो चुके हैं। जबकि 2017-18 में लगभग 3500 कॉलरी श्रमिक रिटायर होने को है । वर्तमान क्षेत्र की कोयला खदानों में लगभग 7200 श्रमिक काम कर रहे हैं। अगले साल आधे श्रमिक रिटायर हो जाएंगे। इसका मतलब कॉलरी कर्मियों की रिटायरमेंट के साथ-साथ चिरमिरी से एक साल में लगभग 14 हजार लोग पलायन करने वाले है। इस तरह से हो रहे रिटायरमेंट के बाद पलायन को रोकने में एसईसीएल के अलावा राज्य सरकार भी गंभीर नहीं है।
ये कैसा नगर निगम – विडंबना यह है कि जिले के एकमात्र नगर निगम का हाल ये है। सुविधाओं के अभाव में क्षेत्र की आधी आबादी कहाँ चली गई किसी को नहीं पता। पिछले डेढ़ दशक में 17 हजार से अधिक लोग शहर छोड़कर जा चुके हैं। हालात ये हैं कि चिरमिरी के कोरिया कॉलरी में आबादी 16 हजार से घटकर लगभग 8 हजार रह गई है। इसी तहर गेल्हापानी में 5 हजार की आबादी 2 हजार तक सिमट गई है। पोड़ी वेस्ट चिरमिरी में आधे से अधिक आबादी पलायन कर चुकी है। 
af16e230-3f0d-44c3-9c3f-e9518eb16d8dइतिहास में कोयला खान – चिरमिरी खदान सन् 1928 में मेसर्स डागा, कुरासिया खान सन् 1932 में, रेल्वे एन0सी0पी0एच0 खान सन् 1941 में दादा भाई , नार्थ चिरमिरी खान सन् 1946 में श्री के0सी0 थापर, वेस्ट चिरमिरी खान सन् 1950 में इंदर सिंह और कोरिया डोमनहील खान सन् 1962 में एन0सी0डी0 जैसे निजी मालिको ने खदानों को खोलकर राष्टीयकरण के पूर्व श्रमिकों से बधुआ मजदूर जैसे बल पूर्वक कोयले का दोहन किया और धन संपत्ति अर्जित कर यहां से पलायन किया। उन दिनों श्रमिक आंदोलन या श्रमिक संगठन प्रायः नही के बराबर थे। अब एतिहासिक पृष्ट भूूमि के बाद वर्तमान की स्थिति पर जब हम गौर करें तो आप को यह भी साफ दिखाई पड़ेगा की उस समय से आज एस0ई0सी0एल0 अधिकारियों ने क्षेत्र का बस दोहन ही किया है अनाब सनाब और टारगेट पूरा कर दिखाने तथा प्रमोशन की फिराक में शहर के रहवासी श्रमिकों के लिएं बिलकुल भी नही सोचा।
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