रायपुर। छत्तीसगढ़ में नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के 16 हजार से अधिक कर्मचारी पिछले एक माह से हड़ताल पर डटे हुए हैं। 10 सूत्रीय मांगों को लेकर 18 अगस्त से जारी इस आंदोलन ने स्वास्थ्य सेवाओं को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। अस्पतालों में इलाज ठप है और मरीज परेशान हैं।
लगातार चेतावनी के बाद भी जब कर्मचारी काम पर नहीं लौटे तो स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए नोटिस जारी कर दिया है। इसमें साफ कहा गया है कि यदि कर्मचारी तुरंत ड्यूटी पर नहीं लौटते तो बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले भी 25 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा चुका है।
सरकार का कहना है कि कर्मियों की 10 में से 5 मांगें पूरी की जा चुकी हैं, बावजूद इसके हड़ताल खत्म नहीं की गई। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि सरकार संवेदनशील है लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं को ठप करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती।
उधर, NHM संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित मिरि का कहना है कि बर्खास्तगी का आदेश आंदोलन को और तेज करेगा। वहीं इस मुद्दे पर सियासत भी गरमा गई है। कांग्रेस नेताओं ने कर्मियों की मांगों को जायज बताया है। पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने कहा कि सरकार को कर्मचारियों की समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए, न कि उन्हें धमकाना चाहिए।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कहा कि सरकार ने पांच मांगें मान ली हैं और शेष मांगों पर विचार केंद्र के स्तर पर होना है। ऐसे में कर्मचारियों को हड़ताल खत्म कर काम पर लौटना चाहिए।
अब सबकी निगाहें NHM कर्मचारियों के अगले कदम पर हैं — क्या वे सेवाओं में लौटेंगे या फिर नौकरी गंवाने का जोखिम उठाएंगे।
