दुर्ग। जिला अस्पताल दुर्ग में भर्ती एक युवती की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन और ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया है कि समय पर रक्त उपलब्ध नहीं होने के कारण उसकी जान चली गई। घटना के बाद परिजनों में आक्रोश है और उन्होंने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है।
जानकारी के अनुसार मरोदा निवासी दीपिका गाड़ा सिकल सेल बीमारी से पीड़ित थी। उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान चिकित्सकों ने रक्त चढ़ाने की आवश्यकता बताई और परिजनों से ब्लड की व्यवस्था करने को कहा।
परिजनों का आरोप है कि उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे तत्काल रक्त की व्यवस्था नहीं कर सके। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन और ब्लड बैंक से अनुरोध किया कि एक यूनिट रक्त उपलब्ध करा दिया जाए, ताकि तब तक वे अन्य व्यवस्था कर सकें। परिजनों के अनुसार ब्लड बैंक से उन्हें रक्त नहीं दिया गया, जिसके चलते दीपिका की हालत लगातार बिगड़ती गई और बाद में उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर संवेदनहीनता और लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि समय पर रक्त उपलब्ध हो जाता तो शायद दीपिका की जान बचाई जा सकती थी।
दुर्ग जिला अस्पताल जिले सहित आसपास के क्षेत्रों के मरीजों के लिए प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है। ऐसे में एक मरीज को समय पर रक्त नहीं मिल पाने और मौत होने की घटना ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठने लगी है।
मुख्य बिंदु
मरोदा निवासी दीपिका गाड़ा की जिला अस्पताल में मौत।
सिकल सेल बीमारी के चलते अस्पताल में थी भर्ती।
परिजनों ने ब्लड बैंक पर रक्त नहीं देने का आरोप लगाया।
समय पर रक्त नहीं मिलने से मौत होने का दावा।
अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।
मामले की जांच और कार्रवाई की मांग।
