फ्ल्यू डस्ट की आड़ में ट्रकों से बाहर निकलता था स्क्रैप, फर्जी बिल और बदले हुए GPS-नंबर प्लेट से चलता था खेल
भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) में कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की लोहा चोरी के मामले की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, प्लांट से कीमती लोहा और स्क्रैप को फ्ल्यू डस्ट (धूल-राख) की आड़ में ट्रकों के जरिए बाहर निकाला जाता था। पूरे नेटवर्क को बेहद सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा था, जिसमें ट्रकों, ड्राइवरों और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता था।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, ट्रकों में पहले लोहे की प्लेटें और स्क्रैप छिपाकर लोड किया जाता था, जिसके ऊपर फ्ल्यू डस्ट भर दी जाती थी ताकि सुरक्षा जांच के दौरान चोरी का माल दिखाई न दे। आरोप है कि सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देने के लिए समान रंग के ट्रकों की नंबर प्लेट और GPS डिवाइस तक बदल दिए जाते थे। कुछ ट्रकों में विशेष गुप्त चेंबर बनाए गए थे, जबकि बंद हो चुके वाहनों के पंजीकरण नंबरों का भी उपयोग किए जाने की बात सामने आई है।
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि वजन में गड़बड़ी पकड़ में न आए, इसके लिए ट्रकों के पहियों की जगह स्क्रैप भरने जैसी तरकीबें अपनाई जाती थीं। चोरी किए गए लोहे को फर्जी बिलों के जरिए वैध दिखाकर विभिन्न रोलिंग मिलों तक पहुंचाया जाता था, जिससे पूरे अवैध कारोबार को कानूनी रूप देने की कोशिश की जाती थी।
प्रारंभिक आकलन के अनुसार, पिछले छह महीनों के दौरान करीब 20,800 टन लोहा प्लांट से बाहर निकाला गया, जिसकी अनुमानित कीमत 104 से 114 करोड़ रुपये के बीच बताई जा रही है। पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े सभी लोगों की भूमिका की गहन जांच कर रही हैं। मामले में आगे और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और चोरी के नेटवर्क से जुड़े ट्रांसपोर्टरों, स्क्रैप कारोबारियों तथा अन्य संदिग्धों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
