00 चिरिमिरी में 300 श्रमिक परिवारों के घर शौचालय विहीन
कोरिया – चिरिमिरी / कैसे बनेगा भारत स्वच्छ यह सवाल है ! यह सवाल इस लिये क्योंकि अभियान का पालन कितना होता है जमिनी स्तर पर तो यह नजर ही नही आता है। दरअसल कोरिया जिले के SECL क्षेत्र में एक बड़ा इलाका शौचालय विहीन है इस इलाके को छोटा बाजार के नाम से जाना जाता है जहाँ लगभग 300 मकानों में शौचालय ही नहीं है, हलांकि केन्द्र और राज्य सरकारों के द्वारा बडे़ – बडे कैपेन चलाकर इस अभियान का प्रचार-प्रसार करने के साथ-साथ स्वच्छता का संदेश दिया जा रहा है जिसका असर देखने को भी मिल रहा है। खैर दिगर जिले और राज्यों को छोड़ दें और सीधी बात करें तो कोरिया जिले की तस्वीरें जहाँ सोच वहाँ शौचालय के स्लोगन की कलई खोल रखी है।
स्वच्छ भारत अभियान के तहत शुरूआती दौर मे बडे़ पैमाने पर स्थानीय प्रशासन सहित राजनैतिक दलों और समाजसेवी संगठनों के द्वारा कई स्थानो को शौच मुक्त दिखा कर खूब वाहवाही बटोरी गई। खैर बात आई गई हो गई, लेकिन मौजूदा हालात और तस्वीरें ये साफ बयां कर रही है कि अब इस ओर कितना ध्यान दिया जा रहा होगा। भारत को स्वच्छ बनाने का सपना हम सब देख रहे हैं. इस दिशा में सरकार शौचालयों के निर्माण में जी तोड़ मेहनत कर तेजी दिखाने प्रयास कर रही है. पर इन सब बातो के उलट अब भी छत्तीसगढ़ में कोरिया जिले के नगरीय क्षेत्र चिरिमिरी इलाके में कुछ ऐसे क्षेत्र है जहाँ मकान तो ४०-५० वर्ष पहले बना दिए गए और लोग रहने भी लगे पर आज तक उन मकानों में शौचालय नहीं बन सके है. इन मकानों को कोल इण्डिया की मणिरत्न का दर्जा प्राप्त कर चुकी SECL ने मजदुर वर्ग के लोगो के रहने के लिए बनाया था तब से अब तक वो मजदुर इस मुलभुत सुविधा को लेकर जूझ रहे है।
आंकड़ों पर नजर – कोरिया जिले के नगरीय क्षेत्र चिरिमिरी अंतर्गत आने वाले वार्ड क्रमांक 21, 22, 23 और 24 के इलाको में आंकड़े बताते है की सरकारी दफाई – 50, कच्ची दफाई – 100, दलगंजन दफाई – 50, कपूर सिंह दफाई – 50, टीना दफाई – 10, धम्मन दफाई – 20, न्यू माईनस क्वाटर – 50 कॉलेज के समीप वाले इन क्षेत्रो में लगभग 300 श्रमिक परिवार के घरों में शौचालय आज तक नहीं बना है।
जहाँ सोच वहाँ शौचालय – सूबे में लगातार लोगो को जागरूक करने दीवारों में लिखा जा रहा और टीवी चैनलों के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है जहाँ सोच वहाँ शौचालय की बात समझाई जा रही है पर SECL की शायद यह सोच ही नहीं तभी तो शौचालय नहीं बनाए गए।
खतरनाक है खुले में शौच करना – चाहे मौसम कोई भी हो ठण्ड, गर्मी या बरसात इन श्रमिक परिवारों को खुले में ही शौच के लिए जाना पड़ता है इनकी यह हालत नई नहीं है बल्कि वर्षो पुरानी है। जिस वक्त चिरिमिरी इलाके की परिकल्पना गढ़ी जा रही थी उस वक्त ही अगर SECL ने मकानो के साथ शौचालय बना दिया गया होता तो शायद ये तकलीफ आज नहीं उठानी पड़ती। वर्तमान स्थिति की बात गर हम करे तो आप यकीन मानिए इन्हे गंदे नालों के आस – पास देखने में शर्म से पानी – पानी हो जाएंगे।
कहने को शुलभ शौचालय – इन 300 परिवारों को दिखाने और कहने को शुलभ शौचालय की सुविधा SECL ने मुहैया कराई है जिसमे अब कोई जाना नहीं चाहता चुकी शौचालय की टंकियों में पानी की एक बूँद तक नहीं है शौचालय में बैठने वाले हिस्से टूटे हुए है और बैठने पर ये डर बना रहता है की न जाने कब शौच करने वाला व्यक्ति निचे धस जाए यही नहीं दरवाजे भी गायब हो चुके है और तो और शौचालय के सेप्टी टैंक खुले होने के कारण दुर्गन्ध की समस्या सबसे बड़ी है अब ऐसी स्थिति में इन शुलभ शौचालय को शुलभ कहना बैमानी होगा।
श्रमिक संगठन खामोश क्यों – यह वाकई बड़ा सवाल है यु तो इस इलाके में 05 बड़े श्रमिक संगठन है पर उन्होंने इस समस्या पर आज तक नहीं सोचा, न जाने वो कौन कारण है जो श्रमिकों को अपना हितैशी बताने वाले ऐसे संगठन इतने लम्बे समय से खामोस है।
