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आंगनवाड़ी केंद्र में पिलाया जा रहा एक्‍सपायरी दूध, जिला प्रशासन चुप

कोरिया / जिले के आंगनवाड़ी केंद्र में बच्‍चों को एक्सपायरी डेट वाले दूध पिलाये जाने का मामला सामने आया है।

छत्‍तीसगढ़ प्रदेश सरकार गर्भवती माताओं और शिशुओं को बेहतर पोषण देने के उद्देश्य से आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन कर रही है, लेकिन कोरिया जिले में अधिकारियों की अनदेखी के चलते जिस प्रकार आंगनवाड़ी संचालित हो रहे हैं, उससे शासन की योजना में पलीता लगता हुआ दिखाई दे रहा है।

जब कुछ आंगनवाड़ी केंद्रों का दौरा किया तो कई चौंकाने वाली बात सामने आई। जिले के खडगंवा विकासखंड के आदर्श आंगनवाड़ी केंद्र आंधीवर की स्थिति ऐसी है, जिसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस आंगनवाड़ी केंद्र में 40 बच्चे दर्ज हैं लेकिन इस केंद्र में पिछले गुरुवार को महज 6 बच्चे ही पहुंचे थे। इस आंगनवाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता रीता जायसवाल पिछले साल से केंद्र नहीं आ रही हैं। इस कारण आंगनवाड़ी का संचालन प्रभावित है। इस बारे में प्रभारी परियोजना अधिकारी मीनाक्षी पुहुप के निर्देश पर कई बार नोटिस दिया गया, लेकिन श्रीमती जायसवाल के परिजनों ने नोटिस लेने तक से इंकार कर दिया। वर्तमान में इस आंगनवाड़ी केंद्र की जिम्मेदारी यहां पदस्थ सहायिका पर है। कुछ ऐसा ही आलम ग्राम पंचायत पोडीडीह के अंर्तगत आने वाली आंगनवाड़ी का है। इस आंगनवाड़ी केंद्र में कार्यकर्ता के रूप में मोतीमनी तथा सहायिका के रूप में कैलाशो बाई पदस्थ हैं। जब इस आंगनवाड़ी का दौरा किया तो यहां गंभीर लापरवाही देखने को मिली।

सरकार के निर्देशानुसार इन आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को देने के लिए दूध आता है। पर बच्चों को जो दूध वितरित किया गया, उसकी एक्सपायरी डेट निकले 15 दिन से अधिक का समय बीत चुका था। उसके बाद भी बच्चों को यही दूध पिलाया गया। आंगनवाड़ी केंद्र में पन्द्रह दिन पहले एक्सपायर हो चुके दूध के पैकेट इस बात की गवाही दे रहे थे कि इस आंगनवाड़ी केंद्र में कितनी लापरवाही बरती जा रही है।

ऐसे में एक आंगनवाड़ी में जहां एक साल से कार्यकर्ता नहीं आ रही, वहां जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ नोटिस देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ले रहे हैं। वहीं एक आंगनवाड़ी ऐसी है, जहां बच्चों को एक्सपायरी डेट का दूध पिलाया जा रहा है लेकिन फिर भी प्रभारी महिला बाल विकास अधिकारी बोलने को तैयार नहीं।

यह जांच का विषय है कि करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद इन आंगनवाड़ी केंद्रों में आखिर किसका पोषण हो रहा है।

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