कोरिया / प्रदेश में विधानसभा चुनाव को अभी वक्त है पर साल भर पहले से ही राजनैतिक दलों द्वारा अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी गई है।
सत्तारूढ़ दल द्वारा भी व्यापक स्तर से अपनी तैयारियां की जा रही हैं, पहले बोनस त्यौहार फिर तेंदूपत्ता बोनस त्यौहार और अब बिजली त्यौहार के साथ ही बेमिसाल 14 साल के नारे सरकार अपने विकास कार्यों का लेखा – जोखा लेकर जनता के करीब पहुँचने का प्रयास कर रही है। भले ही यह सभी आयोजन शासकीय हों लेकिन यह हर नागरिक अच्छी तरह समझ रहा है कि यह सरकार की चुनावी तैयारी है।
अब बात अगर विधानसभा सीटों को लेकर की जाए तो सबसे ज्यादा चर्चा इन दिनों कोरिया जिले के बैकुंठपुर विधानसभा को लेकर आम मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं मे चल रही है। चर्चा यह भी है कि इस बार बैकुंठपुर के वर्तमान विधायक और प्रदेश के श्रम मंत्री भईयालाल राजवाड़े को पार्टी किसी दूसरी सीट से चुनाव लड़ा सकती है, ऐसा इसलिए कि इस कार्यकाल में श्री राजवाड़े की कार्यकर्ताओ से दूरियां बढी हैं, उनके इर्द-गिर्द ऐसे कार्यकर्ता दिखाई देते हैं जिनकी जमीनी हकीकत एकदम शून्य है। पुराने पार्टी पदाधिकारी और जमीनी पकड़ रखने वाले नेता आज उनसे बहुत दूर दिखाई देते हैं और सभी कहीं न कहीं श्री राजवाड़े से थोड़ा नाराज बताये जाते हैं।
बैकुंठपुर सीट में राजवाड़े समाज की बाहुल्यता के कारण ऐसे भी कयास लगाए जा रहे हैं कि भईयालाल राजवाड़े की टिकट नही कटेगी लेकिन इस जनचर्चा से निश्चित ही जोर पकड़ लिया है कि इस बार वे विधानसभा भटगांव से चुनाव लड़ेंगे, हालांकि खुद वे इस सीट को नही छोड़ना चाहते लेकिन पार्टी के सर्वे में भी उनकी स्थिति काफी कमजोर बताई जा रही है। जिसके कारण पार्टी द्वारा ही बैकुंठपुर सीट से न लड़ाकर उन्हें भटगांव भेजने की तैयारी की जा रही है। भटगांव सीट में भी राजवाड़े समाज के लगभग 30000 मतदाता हैं। जहां से वर्तमान में पारसनाथ राजवाड़े कांग्रेस के विधायक हैं। पारसनाथ राजवाड़े की कार्यशैली से वहां की जनता भी नाखुश बताई जाती है और भाजपा में भी दूसरा ऐसा नेता वहां दिखाई नही देता जो बाहर से आकर चुनाव लड़े औऱ जीत दर्ज कर सके। यह उल्लेखनीय है कि श्रम मंत्री भैयालाल राजवाड़े सरगुजा संभाग में सर्वमान्य नेता हैं और भटगांव विधानसभा में उनकी खासी पकड़ मानी जाती है इसकी वजह से ही उनके भटगांव विधानसभा से चुनाव लड़ाने की पार्टी की तैयारी को बल मिलता नजर आ रहा है।
आखिर अमर अग्रवाल ने भी कर ही दिया इशारा-
श्रम मंत्री कोे पार्टी द्वारा भटगांव विधानसभा से चुनाव लड़ाने की तमाम अटकलों को तब और बल मिल गया जब पिछले दिनों कोरिया प्रवास पर आए प्रभारी मंत्री ने श्री राजवाड़े को साफ शब्दो मे कह दिया कि राजवाड़े जी इस बार आप बैकुंठपुर से परेशान मत हो,भटगांव से तैयारी करो, पार्टी ने यहां नए प्रत्याशी की तलाश शुरू कर दी है। बताया जाता है कि श्री अग्रवाल ने दो बार यह बात दोहराया, उन्होंने सबसे पहले मनेन्द्रगढ़ विश्रामगृह भवन में श्रम मंत्री को स्पष्ट शब्दों में उक्त बातें कही। यही नही उन्होंने दोबारा उदलकछार रेलवे स्टेशन में भी यही बातें कहीं। जिले के तमाम बड़े नेताओं की मौजूदगी में प्रभारी मंत्री द्वारा यह इशारा जरूर पार्टी में चल रही बातों की ओर इशारा करता है। हालांकि मंत्री अमर अग्रवाल के द्वारा इस इशारे को श्रम मंत्री भईयालाल राजवाड़े हँसकर टाल गए। लेकिन इस दौरान वहां मौजूद तमाम नेता इस बात को लेकर चर्चा करने से नही चुके।
दावेदारों का साफ कहना, पहले श्री राजवाड़े उसके बाद पार्टी का निर्णय सर्वमान्य –
श्रम मंत्री भईयालाल राजवाड़े को भटगांव से यदि चुनाव लड़ाया जाता है तो इसके लिए वर्तमान में भाजपा के पास भी दमदार व्यक्तित्व का नेता नही है फिर भी पार्टी द्वारा नए प्रत्याशी की तलाश की जाने की चर्चा और सर्वे कराए जाने की जानकारी मिल रही है। पार्टी की इस तैयारी को कुछ दिनों बाद गुजरात चुनाव सम्पन्न होने के बाद और मजबूती मिलने की संभावना है। क्योंकि इस चुनाव के बाद पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व भी प्रदेश पर ही फोकस करेगा। इसी बीच श्रम मंत्री के बैकुंठपुर से चुनाव न लड़ने की स्थिति में पार्टी की नजर पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष शैलू शिवहरे के अलावा विधायक प्रतिनिधि रेवा यादव व सोनहत क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र तिवारी पर भी लगी हुई है। इनमें से सभी की इच्छा भी बैकुंठपुर से चुनाव लड़ने की है लेकिन इस शर्त पर कि सबसे पहले दावेदार भईयालाल राजवाड़े ही हैं यदि उन्हें किसी अन्य सीट पर भेजा जाता है तो फिर पार्टी का निर्णय सर्वमान्य होगा। लेकिन यहां यह बताना लाजमी होगा कि श्री राजवाड़े के बैकुंठपुर विधानसभा से चुनाव न लड़ने की स्थिति में यह सीट भी भाजपा के लिए आसान नही होगी, कांग्रेस का प्रत्याशी ही भाजपा का जीत हार तय करेगा।
इनमें से शैलेश शिवहरे बैकुंठपुर नगरपालिका अध्यक्ष का चुनाव काफी कम वोट से हार चुके हैं लेकिन युवाओं सहित शहरी मतदाताओं में आज भी उनकी पैठ नजर आती है, ग्रामीण इलाकों में भी श्री शिवहरे किसी परिचय के मोहताज नही हैं। जायसवाल समाज भी पुरे विधानसभा में मतदाताओ को प्रभावित करने की स्थिति में है। ऐसे में पार्टी उन्हें भी प्रत्याशी बना सकती है। हालांकि शैलू शिवहरे खुद कहते हैं कि हमारे नेता सिर्फ और सिर्फ भैयालाल राजवाड़े जी हैं वे सर्वमान्य नेता हैं और जनता के हितैषी हैं, वे ही इस बार भी प्रत्याशी होंगे।
वहीं विधायक प्रतिनिधि रेवा यादव जो कि श्री राजवाड़े के सबसे करीबी माने जाते हैं उन पर भी पार्टी की नजर है, विधानसभा के सभी पोलिंग बूथों पर इनकी पकड़ है यादव समाज के जिला अध्यक्ष है लेकिन कमजोरी है कि वे आज तक कोई चुनाव नही लड़े हैं पर स्वयं श्रम मंत्री ही अपने बाद इस सीट का उत्तराधिकारी मानते है तो जाहिर है कि वो साथ जरूर देंगे।
तीसरे दावेदार के रूप में इन दिनों जोरशोर से चर्चा जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र तिवारी की भी चल रही है, युवा नेतृत्व के साथ ही पार्टी में भी उनकी खासी पकड़ है, उन्हें भी पार्टी इस सीट से चुनाव लड़ा सकती है। लेकिन एक सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनका स्थायी निवास अभी सोनहत क्षेत्र में है और बैकुंठपुर क्षेत्र की जनता से अभी उनका सीधा संवाद नही है। अगर किसी भी प्रकार अंतिम स्थिति में श्रम मंत्री भैयालाल राजवाड़े का टिकट पार्टी इस सीट से काटकर दूसरी सीट से चुनाव लड़ाती है तो यह निश्चित है कि बैकुंठपुर विधानसभा से इन तीनो चेहरे में से एक पर ही पार्टी अपना दांव खेल सकती है।
