कोरिया / कॉपी-पुस्तक पकडऩे की उम्र में बच्चे शराब की खाली बोतले इकट्ठा कर उसे बेच रहे है ताकि उनकी जरूरते पुरी हो सके और प्रदेश की सरकार है कि 14 साल बेमिसाल के साथ तिहार पर तिहार मना रही है। ऐसे तिहार की प्रदेश में फिलहाल क्या जरूरत जब हम प्रदेश के कई बच्चों को ही सही दिशा दे पाने में असमर्थ हो रहे हो तब?
आपको बता दे कि गरीबी में जीवन बसर कर रहे बच्चे शराब की खाली बोतल बेचकर जेब खर्च का इंतजाम कर रहे हैं। जिले के नगरीय क्षेत्र नगर निगम चिरिमिरी में कई बच्चों को नालियों, कचरा के आसपास, घरों में बोतल बीनते देखा जा सकता है।

यह तस्वीर चिरिमिरी हल्दीबाड़ी इलाके की है जहाँ पैर में जूत-चप्पल नहीं। बदन पर स्कूल गणवेश भी नही। इनके पास है तो सिर्फ एक बोरी जिसमें है शराब की खाली बोतलें। बच्चे से पूछने पर बताया कि वह इन खाली बोतलों को बेचकर अपनी जरूरत का सामान खरीदते है और वे स्कुल जाते है पर आज नही गए है चुकी आज उन्हें पैसों की जरूरत रही इन्हें वो बेच कर उन जरूरतों को पुरा करेंगे।
खाली बोतल बीनते दिख जाते हैं दर्जनों बच्चे –
नगर व आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में शराब की खाली बोतल ढूंढकर बेचने के काम में सैकड़ों बच्चे लगे देखे जाते हैं। जानकारी के अनुसार नशे में आदी कुछ पालक स्वयं खाली बोतलों को बच्चों को दे देते हैं। जिसे बेचकर बच्चे अपने लिए चाकलेट बिस्किट खरीदते हैं। इस कार्य में लगे बच्चे ऐसे कई ठिकानों को बखूबी जानते हैं जो अघोषित मदिरालय बने हुए हैं।
ब्रेड बेचने वाले करते हैं प्रेरित –
शहरी क्षेत्र में ज्यादातर कबाड़ी बच्चों के द्वारा लाए गए शराब की खाली बोतलों को खरीद कर इसका नगद भुगतान कर देते हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में बर्फ, ब्रेड बेचने के लिए फेरी लगाने वाले ज्यादातर कारोबारी बच्चों के द्वारा दिए गए खाली बोतल रखकर इसके एवज में सामान दे देते हैं, जिससे बच्चे इस कार्य के लिए प्रेरित होते हैं। गरीबी और लाचारी में शराब की बोतलों को उठाने में बच्चों को बचपन गुजर रहा है।
जिम्मेदार कौन ?
जाहिर सी बात है कि इस कार्य के लिए संबंधित विभागों के अधिकारी जिम्मेदार हैं और इस समस्या के लिए बच्चों के अभिभावक भी जिम्मेदार है। हालाँकि अभी उनसे चर्चा नही हो सकी है।
