सवाल उठाए रायपुर के नितिन सिंघवी ने, कहा – कानून है तो उसका पालन क्यों नहीं?
रायपुर, 4 जून।
विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) की पूर्व संध्या पर रायपुर के जागरूक नागरिक नितिन सिंघवी ने प्रदेश के जिम्मेदारों से तीखे सवाल पूछे हैं। उन्होंने पूछा है कि जब छत्तीसगढ़ में हर प्रकार की प्लास्टिक और पॉलीथिन पर प्रतिबंध लागू है, तो फिर इस पर सख्ती से अमल कराने के बजाय लोगों को सिर्फ शपथ क्यों दिलाई जाती है? उन्होंने कहा कि जब कानून है, और उसे लागू कराने के लिए 50 से अधिक श्रेणी के अधिकारी नामित हैं, तब केवल जागरूकता अभियान, एनजीओ से सहयोग, कपड़े के थैले बांटना, बर्तन बैंक खोलना जैसे प्रतीकात्मक प्रयास क्यों किए जा रहे हैं?
सिंघवी का कहना है कि यदि प्रतिबंध का ईमानदारी से पालन कराया जाए तो इन सभी कदमों की जरूरत ही नहीं पड़े।
प्लास्टिक प्रदूषण: मानव सभ्यता के लिए गंभीर खतरा
सिंघवी ने कहा कि जलवायु संकट और जैव विविधता को नुकसान के बाद प्लास्टिक प्रदूषण आज मानव डीएनए तक को प्रभावित कर रहा है। इसका प्रभाव मानव शरीर के हर अंग पर पड़ रहा है और आने वाले वर्षों में यह और भी गंभीर स्वरूप ले सकता है।
“जब हम जानते हैं कि प्लास्टिक हमारे शरीर, नदियों, समुद्र, वायुमंडल और जमीन के लिए ज़हर है, तो इसे खत्म करने के लिए शपथ क्यों? सख्त कार्रवाई क्यों नहीं?” – नितिन सिंघवी
कहाँ से आ रही है प्रतिबंधित प्लास्टिक?
सिंघवी ने पूछा कि जब अधिकारी यह दावा करते हैं कि प्रदेश में प्रतिबंधित प्लास्टिक का निर्माण नहीं हो रहा है, तो फिर हर गली-मोहल्ले में ये प्लास्टिक थैले और अन्य वस्तुएं किस रास्ते से पहुँच रही हैं?
उन्होंने यह भी कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि यह जानलेवा सामग्री कहाँ से आ रही है और क्यों रोकी नहीं जा पा रही है?
छत्तीसगढ़ में प्लास्टिक प्रतिबंध की स्थिति क्या है?
छत्तीसगढ़ में 2023 में अधिसूचित नियमों के अनुसार निम्न वस्तुएँ प्रतिबंधित हैं:
- सभी प्रकार के प्लास्टिक बैग (हैंडल सहित या बिना)
- थर्मोकोल और प्लास्टिक से बने डिस्पोजेबल बर्तन
- गुटखा/पान मसाले की प्लास्टिक पैकिंग
- सजावट में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक झंडे, बैनर, फ्लेक्स
- प्लास्टिक आधारित नॉन वूवेन बैग (जो कपड़े जैसे दिखते हैं)
- PET/PETE बोतलें (विशेष शर्तों के साथ ही)
कौन-कौन जिम्मेदार हैं?
राज्य शासन ने नगर निगम, पंचायत, जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग, पुलिस, वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, आबकारी, पर्यावरण बोर्ड सहित दर्जनों विभागों के अधिकारियों को नियम लागू कराने के लिए अधिकृत किया है। इसके बावजूद प्रतिबंध का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।
प्रतिबंध किस पर लागू है?
यह प्रतिबंध सभी दुकानदारों, व्यापारी प्रतिष्ठानों, स्कूल-कॉलेज, होटल-ढाबों, स्ट्रीट वेंडर्स, आयोजकों, धार्मिक स्थलों, सरकारी कार्यालयों, शादी हॉल, पर्यटन स्थलों और यहाँ तक कि जंगलों और खदानों तक पर लागू है।
अब वक्त है सख्ती का
नितिन सिंघवी की यह मांग सीधे तौर पर प्रशासन की जवाबदेही को चुनौती देती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सिर्फ “शपथ दिलाना” काफी नहीं, कार्रवाई ज़रूरी है। जब प्रदेश में स्पष्ट कानून मौजूद है तो उसका पालन न होना स्वयं में विफलता है। पर्यावरण दिवस की महज रस्म अदायगी के बजाय, वास्तविक और सख्त अमल ही प्रदूषण से लड़ने का सही रास्ता है।
