** बजट में किसानों की उपेक्षा पीड़ादायक और दुर्भाग्यपूर्ण : कांग्रेस
रायपुर / बजट के दूसरे दिन भी प्ररिक्रियाओं का दौर जारी है। बजट में किसानों की उपेक्षा और गांव गरीब किसान मजदूर की उपेक्षा का आरोप लगाते हुये वरिष्ठ कांग्रेस नेता धनेंद्र साहू, कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश त्रिवेदी प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री गिरीश देवांगन ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि किसान छत्तीसगढ़ में सबसे ज़्यादा प्रताड़ित और शोषित वर्ग है।
इसी वर्ग को भाजपा की सरकार ने पिछले 15 वर्ष में सबसे अधिक धोखा दिया है और यह पीड़ाजनक है कि अपने अंतिम बजट में भी डॉ रमन सिंह ने किसानों को कुछ नहीं दिया। शासन जहां एक ओर 96 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित कर चुकी है और उसके लिए सूखा राहत राशि प्रति एकड़ के हिसाब से देने के लिए राशि की घोषणा भी कर चुकी है। प्रभावित किसानों की सूची प्रभावित जिलों के कलेक्टरों के पास पहुंच चुकी है लेकिन शासन जिस प्रकार से लगातार किसानों पर एहसान जता कर बोनस और अन्य सुविधाएं देती है। उसी तर्ज पर किसानों को मिलने वाली अकाल क्षतिपूर्ति को जानबूझकर रोककर अपना किसान विरोधी चेहरा को प्रमाणित कर रही है। वहीं दूसरी ओर इन अकाल ग्रस्त घोषित तहसीलों के किसानों को अभी तक से फसल बीमा के क्षतिपूर्ति का कोई अता-पता नहीं है और न ही शासन द्वारा किसानों की कर्जमाफी करने की कोई पहल की जा रही है।
यह तथ्य है कि भाजपा के शासनकाल में ही छत्तीसगढ़ के किसानों को आत्महत्या का रास्ता अख़्तियार करना पड़ा। इसी शासनकाल में पलायन बढ़ा और किसान लगातार मज़दूर बनते गए। आंकड़े गवाह हैं कि पिछले 14 वर्षों में खेती की ज़मीन कम हुई, सिंचाई का पानी उद्योगों को दे दिया गया और भाजपा के उद्योगपति मित्रों को फ़ायदा पहुंचाने के लिए किसानों की ज़मीनें हड़प ली गईं।
किसानों को 2100 रुपए का समर्थन मूल्य मिला और न 300 रूपए का दो साल का बकाया बोनस। कांग्रेस के दबाव में चुनावी वर्ष में बोनस दिया भी गया तो अहसान जताकर।किसानों को फ़सल बीमा के नाम पर ठग लिया गया और 45 पैसे जैसी हास्यास्पद राशि तक मुआवज़े में दी गई।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष प्रदेश में 96 तहसीलों में भीषण सूखा है। वास्तव में इससे कहीं अधिक तहसीलें सूखे की चपेट में हैं। लेकिन बजट में रमन सिंह जी की सूखे को लेकर कोई चिंता नहीं दिखती। न वे सिंचाई की कोई योजना करते हैं और न पलायन रोकने के लिए रोज़गार का कोई इंतज़ाम करते दिखते हैं और तो और महात्मा गांधी रोज़गार गारंटी क़ानून (मनरेगा) की राशि 600 करोड़ कम कर दी गई।
प्रदेश में सबसे बड़ी आबादी किसानों की है और बजट में सबसे बड़ी उपेक्षा भी किसानों की हुई है। न किसानों को डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देने का कोई संकेत है और न स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट का कोई ज़िक्र…।
कांग्रेस किसानों की पीड़ा को समझती है और वादा करती है कि अगला बजट जब कांग्रेस पेश करेगी तो किसानों की समस्याओं के स्थाई निराकरण के लिए ठोस उपाय किए जाएंगे।
