पेण्ड्रा से दुर्गेश सिह बिसेन की खास रिपोर्ट…
तेंदूपत्ता संग्रहक से विधायक बने रामदयाल उईके कांग्रेस के कद्दावर नेता है। हालाँकि मरवाही से कांग्रेस के तत्कालीन विधायक पहलवान सिह मरावी को हराने के लिए जब भाजपा ने पटवारी की नौकरी छुड़वाकर रामदयाल उईके को टिकट दिया था तब रामदयाल ने बड़ी आसानी से मरवाही कांग्रेस से छीन लिया था।
पर छत्तीसगढ़ अलग होने के बाद अजीत जोगी ने मरवाही सीट चुनी और रामदयाल उईके ने भी जोगी के लिए सहर्ष सीट छोड़ कांग्रेस प्रवेश कर लिया था। जोगी ने भी रामदयाल को न सिर्फ राज्यमंत्री का पद दिया बल्कि अपने खास सिपहसालारों में स्थान भी दिया। रामदयाल भी जोगी के विश्वस्त बनकर जोगी के लिए प्रदेश के साथ दिल्ली तक खड़े हुआ करते थे। जोगी ने भी रामदयाल के लिए न सिर्फ तानाखार की सीट चुन कर दी बल्कि उन्हें ये सीट जीताया भी… पर जब जोगी ने कांग्रेस छोड़ा तो रामदयाल ने भी जोगी का दामन छोड़ दिया।
इस दौरान 3 बार के विधायक रहे रामदयाल लगातार आदिवासी मुख्यमंत्री और आदिवासी अध्यक्ष के लिए आवाज़ उठाते रहे। बाद में बदले राजनीतिक परिदृश्य में आलाकमान ने भी भूपेश पर लगाम लगाते हुए जब चरण दास महंत को चुनाव समिति अध्यक्ष बनाया तो रामदयाल को बतौर इनाम कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया। इससे शायद भीतरखाने में कांग्रेस का एक गुट महत्वाकांक्षी रामदयाल के बढ़ते कद से खुश नहीं है?
शायद इसी वजह से पेण्ड्रा के 17 मई को राहुल गांधी की सभा में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरा सिंग मरकाम को राहुल के साथ मंच साझा कराया जा रहा है।
रामदयाल के सीट छोड़ने की बात हमने इसलिए कही क्योकि हीरासिंह मरकाम सिर्फ तानाखार विधानसभा से ही चुनाव लड़ा करते है। पेण्ड्रा के कोटमी में कांग्रेस के आदिवासी सम्मेलन में हीरासिंह मरकाम जब राहुल गांधी के साथ मंच साझा करेंगे तो आदिवासी वोटर रिझाएंगे ही साथ ही भाजपा पर बरसेंगे और जोगी की पार्टी भी उनके ठीक निशाने पर होगी…
गौर करने वाली बात तो यह है कि ये साथ कांग्रेस पार्टी को चुनाव के दौरान भी मिलता रहे इसके लिए कांग्रेस नेतृत्व हीरासिंह मरकाम को खुश करने तानाखार सीट बतौर तोहफा दे सकता है.. अगर ऐसा हुआ तो मौजूद विधायक रामदयाल उईके के पास सीट छोड़कर दूसरी जगह जाने के अलावा कोई विकल्प नही होगा ?
बहरहाल 17 तारीख अब ज्यादा दूर नही बस बदलते राजनीति समीकरण में हर कुछ सम्भव है, छत्तीसगढ़ में 15 सालो से सत्ता का वनवास झेल रही कांग्रेस अगर गठजोड़ करती है या हीरासिंह की पार्टी का साथ चाहती है तो एक बार फिर रामदयाल उईके को नई सीट पर भाग्य आजमाना होगा
