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ये कैसी स्वक्षता सर्वेक्षण, जो दिलाए ऐसे नगर पंचायत को प्रथम स्थान जिसे की मिलना चाहिए… 0

बलरामपुर-राजपुर से रंजीत सोनी की रिपोर्ट / राजपुर बलरामपुर जिले का एक ऐसा नगरपंचायत है जो अपने कारनामो से हमेशा ही सुर्खियों मे रहता है, यहां के अधिकारी कर्मचारी व जनप्रतिनिधि ऐसे हैं जिन्हे दुनियादारी से कोई सरोकार नही रहता है। इन्हें किसी बड़े अधिकारीयों का भय नही ये अपने मन माफिक कार्य करते हैं। जिसमे बड़े अधिकारियों का भी कोई हस्तक्षेप नहीं रहता, इन्हें बिल्कुल स्वतंत्र छोड़ दिया गया है।

अभी कुछ दिन पहले ही पुरे बलरामपुर जिले मे नगर पंचायत राजपुर को स्वक्षता सर्वेक्षण में प्रथम स्थान दिया गया है, जो ऊनके कार्य के बिलकुल विपरीत है। इस नगर पंचायत का कार्य ऐसा हैं जिनसे इसकी स्थान बिल्कुल लिस्ट से बाहर हो जाना चाहिए था।

ये कैसा स्वक्षता सर्वेक्षण जो ऐसे निष्क्रिय नगर पंचायत को प्रथम स्थान दिया जो बिलकुल अपात्र है। आज 3-7-018 से पुरे नगर पंचायत मे सफाई कर्मी सफाई कार्य बिलकुल ही बंद कर रखा है जिससे आम जनमानस को परेशानीयों का सामना करना पड़ रहा है। हर वार्ड, चौक – चौराहे कुड़े – कचरे भरमार है। चुकी बारिस का मौसम है तो ऐसे में पानी निकासी न होना भी परेशानी की वजह बन गई है। जिससे कई संक्रामक बीमारी होने की आसंका बढ़ गयी है।


नगर पंचायत राजपुर के सी.एम.वो.बसंत बुनकर भी निरन्तर कार्यालय से गायब रहते हैं, प्रभारी अधिकारी भी अपनी दायित्व को निभाने मे विफल हैं। आम जनमानस की शिकायतों का भी इन पर कोई असर नही होता, ऊनका काम वैसा ही है जैसे कहते हैं कि ,,”हांथी चले अपनी चाल और कुत्ते भौंकते रहे” ।

सरकार से ये एक बड़ा सवाल, ये कैसा स्वक्षता सर्वेक्षण जहां हर वार्ड कुड़े कचरे से लबरेज़ है, जहां स्वच्छ भारत मिशन के तहत शुलभ शौचालयों का निर्माण कराया गया है फिर भी लोग खुले मे शौच जाने को मजबूर हैं। क्या स्वक्षता सर्वेक्षण भी सिर्फ दिये गये अनुदान राशि की खपत और कागजी कार्यवाही से तय किया जाता है, क्या सर्वेक्षण कर्ता सिर्फ ऊपरी दिखावे से अपनी रिपोर्ट दाखिल करते हैं, क्या वे जमिनी स्तर की जांच नही कर पाते।

ये मौजूदा सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती के रुप मे दिखाई दे रही है जिसमे सरकार अपनी महत्वकांक्षी योजनाओं का सही रुप से क्रियान्वयन करने मे फेल होते दिखाई दे रही है। कारण निस्क्रिय अधिकारी कर्मचारी जो योजनाओं को पूर्ण रूप से विफल करने मे अपना भरपुर योगदान दे रहे हैं।

आने वाले समय में देखना यही होगा की मौजूदा सरकार इनके ऊपर शिकंजा किस प्रकार से कसेगी।

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