कोरिया चिरमिरी / यूँ तो जिले में कई युवा प्रतिभाओं नें विभिन्न दिशाओं में काम करते हुए अपना जौहर दिखाया है और समाज में अपना नाम रौशन किया है पर एक ऐसा शख्स जिसने योग सेवा को अपना कार्य क्षेत्र चुना और न सिर्फ अपने शहर बल्कि जिले के साथ ही समूचे संभाग प्रदेश में अपनी योग्यता की डंका पीट दिया और वह यहीं नही रुका बल्कि पतंजलि योगपीठ हरिद्वार तक अपने सेवा की खुशबू पहुंचा दी है। यहाँ तक कि योगऋषि स्वामी रामदेव तक ने उनकी सेवा भावना की सराहना की है।
वह शख्स है चिरमिरी के योग शिक्षक संजय गिरि। चाहे धूप ठंढ या बरसात हो वे अपनी निःशुल्क योग सेवा से नही चूकते। इसके पीछे की असीम प्रेरणा के बारे में पूछने पर वे बताते है कि उनके गुरु योगऋषि स्वामी रामदेव का सिर्फ एक संकल्प कि किसी भी व्यक्ति की रोग से मृत्यु न हो और योग सेवा से व्यक्ति सेवा और राष्ट्र सेवा करना है। इसी पीड़ा से प्रेरित हो समूचे जिले सहित अन्य जिलों में भी अपनी योग सेवा देते रहते है। क्षेत्र में योग का नाम लिए जाने पर लोगों की जुबान पर सहज ही संजय गिरि का नाम आ जाता है और वे दिल से श्री गिरि के योगसेवा से जनसेवा की तारीफ करते नही थकते। अभी वे पतंजलि योग समिति के कोरिया जिले के प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे है। पतंजलि योग समिति के माध्यम से समूचे जिले में योग के प्रचार-प्रसार के माध्यम से योग को एक अलग ही स्थान पर ला खड़ा किया है।

श्री गिरि नें बताया कि विभिन्न बीमारियों से पीड़ित लोग चारो तरफ से निराश होकर उनसे सलाह लेने आते है और योग व आयुर्वेद के सलाह से संतुष्ट होकर जाते है।योगऋषि के प्रति इतनी निष्ठा व समर्पण कि उनका पूरा परिवार ही योग सेवा में समर्पित है यहाँ तक कि वे अपने बच्चों का नामकरण भी रामदेव से ही कराया है और वे अपने बच्चों को डॉक्टर- इंजीनियर के बजाय सन्यासी ही बनाना पसन्द करते है क्योंकि उनका कहना है कि सन्यासी के रूप में एक व्यक्ति समाज का ज्यादा भला कर सकता है। अभी हाल ही में क्षेत्र में फैले भयावह डेंगू बुखार से पीड़ितों की व्यथा व एलोपैथी में लाइलाज को देखते हुए जनजागरूकता हेतु आयुर्वेद उपचार का प्रचार- प्रसार कर लोगों को राहत दी है। उनका यही विचार ही उन्हें समाज के सभी वर्गों में एक अलग पहचान देते हुए सम्मानजनक लोकप्रिय स्थान देता है।
