कोरिया जिले में एक बार फिर मानवता शर्मसार हुई है। जिला अस्पताल में इलाज कराने के लिए आई महिला नेशनल हाइवे के किनारे लेटी हुई मिली । समाजसेवियों की नजर पड़ी तो महिला के पति से पूरी जानकारी लेकर उसे इलाज के लिए फिर से जिला अस्पताल ले गए। गन्ध आने पर जिस महिला को अस्पताल से बाहर जाने को कहा गया था। एक पहल के बाद इलाज शुरू हुआ । अब मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन जिम्मेदारों पर कार्यवाही करने की बात कह रहा है।
यह तस्वीर शर्मसार कर देने वाली है। सड़क किनारे जमीन पर लेटी यह महिला और पास में अर्धनग्न कपड़ो में खड़ा उसका पति इंसान के रूप में किसी भगवान का इंतजार कर रहे है जो पास आकर उनकी पीड़ा सुन सके। तस्वीर जिला मुख्यालय की है तो सवाल भी खड़े होना लाजिमी है कि आखिर यह दम्पति किस कारण से इस तरह से नेशनल हाइवे के किनारे है।
दरअसल पूरा मामला यह है कि मनेन्द्रगढ़ के केल्हारी इलाके में रहने वाला सूरजपाल नामक व्यक्ति कैंसर की बीमारी से पीड़ित अपनी पत्नी रामबाई को चौदह जुलाई को मनेन्द्रगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर आया था। महिला को देखने के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए उसी दिन जिला अस्पताल बैकुण्ठपुर के लिये रेफर कर दिया गया। यहाँ महिला को भर्ती कर रात भर वार्ड में रखा भी गया पर जब पन्द्रह जुलाई की सुबह ड्रेसिंग करने की बात आई तो ड्रेसर ने यह कहकर कि गंध ज्यादा आ रही है बाहर जाओ वही आकर ड्रेसिंग करता हु। पर अस्पताल परिसर में बाहर चले गए दम्पति दो घँटे तक ड्रेसर का इंतजार ही करते रहे गये और उसके नही आने पर अस्पताल से अपना सामान लेकर चले गए और बैकुण्ठपुर में मुख्य सड़क पर यहाँ वहाँ भटकते रहे।
बेहतर इलाज के लिये मनेन्द्रगढ़ से बैकुण्ठपुर के जिला अस्पताल आई पीड़ित महिला का इलाज नही हुआ । ऊपर से गले मे हुए घाव के कारण गन्ध आने पर महिला को बाहर जाने को कहा गया। बेबस गरीब ग्रामीण व्यक्ति की सुनने वाला जब कोई नही मिला तो वह अपना सामान लेकर वहाँ से चला गया। सड़क पर घूमते हुए जब पीड़ित कुटुम्ब न्यायालय के पास पहुँचे तो वहा सड़क किनारे बेहोश होकर महिला गिर पड़ी। पति का बदन खुला हुआ था और जेब मे पैसे नही थे कि वह कुछ खाकर भूख को शांत कर सके । किराया नही होने के कारण घर वापस भी नही जा पा रहे थे।
ऐसे में जब बैकुण्ठपुर के समाजसेवी अनुराग दुबे की नजर इनकी तरफ गई तो बात को समझने के बाद पहले तो उन्होंने खाली पेट की भूख को शांत कराया । बाद में गाड़ी में जिला अस्पताल लेकर गए और वहाँ डॉक्टरों से मिलकर इलाज करवाया । महिला जिला अस्पताल में भर्ती है जिसे अस्पताल प्रबंधन जरूरत पड़ने पर बाहर भेजने की बात कह रहा है।
वही इस मामले को लेकर सीएमएचओ का कहना है कि इस तरह से गलत हुआ है और जिम्मेदार के ऊपर कार्यवाही की जाएगी।
मानवता को शर्मसार कर देने का यह जिले में पहला मामला नही है । इसके पहले भी कई मामले सामने आते रहे है पर सवाल इस बात का है कि अस्पताल में लापरवाही की घटनाएं कब रुकेंगी ।

