राजनांदगांव / शहर के बसंतपुर थाने में एक प्रेम का मामला ऐसा आया कि पुलिस भी भौचक रह गई और परिजन सन्न! यहां दो प्यार करने वाले थाने पहुंचे और एक दूसरे से शादी करने की इच्छा जताई।
कहा जाता है कि जब इश्क जुनून बनकर हावी हो तो फिर वह किसी भी हद तक जा सकता है। चाहे इसके लिए उसे समाज से बगावत भी क्यों न करनी पड़े। कुछ ऐसा ही मामला राजनांदगांव शहर के बसंतपुर थाने में आया है। जिसमें दो प्यार करने वाले एक दूसरे से शादी करना चाहते हैं। दोनों बालिग भी हैं। दोनों में बस एक ही समानता है कि वह दोनों महिलाएं हैं ! उनका यह प्यार समाज को गवारा नहीं हो रहा है। इसलिए वे कानून के शरण में पहुंचे हैं। जहां वे अपने लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। दरअसल 28 वर्षीया मालती साहू और 18 वर्षीया प्रीति वर्मा में आज से 9 माह पूर्व दोस्ती हुई थी। यह दोस्ती धीरे-धीरे मोहब्बत में बदल गई । दोनों एक दूसरे के साथ रहने के आदि होते गए ,जीने और मरने की कसमें भी साथ खाली, लेकिन उनके प्यार के पीछे जो बड़ी रुकावट थी वाह उन दोनों का महिला होना है । प्रीति वर्मा ने जब अपने परिजनों से मालती से शादी करने की बात कही तो परिजनों के होश फाख्ता हो गए। परिजनों ने इस शादी को सिरे से नकार दिया । इसके बाद मालती और प्रीति दोनों बसंतपुर थाने पहुंचे और स्वयं को बालिग बताते हुए अपनी मर्जी से शादी करने की इच्छा जताई । जिस पर बसंतपुर थाना प्रभारी राजेश साहू ने उन्हें न्यायालय की शरण में जाने की नसीहत दी।
मालती साहू के द्वारा प्रीति से शादी करने एक आवेदन थाना बसंतपुर में दिया गया है, वहीं इस मामले की सूचना मिलने पर प्रीति के पिता ने भी थाने में मालती के खिलाफ शिकायत की है। जिसमें उन्होंने कहा है कि मालती पूर्व में शादीशुदा थी, जिसका तलाक हो चुका है और वह अब उनकी बेटी को अपने जाल में फांस कर उसे गलत धंधे में धकेलना चाह रही है। प्रीति के पिता के आवेदन के बाद पुलिस ने मामला न्यायालय में ले जाने की सलाह दी है। वहीं मालती साहू ने अपना लिंग परिवर्तन करवाकर प्रीति से शादी करने का हलफनामा पुलिस को सौंपा है। इस अनोखे प्यार की कहानी अब न्यायालय के शरण में पहुंचेगी लेकिन इसकी चर्चा समाज में होने लगी है।
एक लिंग समुदाय के लोग प्रेम पूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर सके इसके लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी समलैंगिक शादी को मान्यता दी हुई है। इसके बावजूद मालती और प्रीति को विवाह के लिए भटकना पड़ रहा है और न्यायालय की शरण में जाने की नौबत भी आन पडी़ है।
