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छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में भ्रष्ट अधिकारियों की मनमानी से हो रहा है जनता के पैसों का बंदरबांट – संजीव अग्रवाल

कोरिया / आरटीआई कार्यकर्ता और काँग्रेस नेता संजीव अग्रवाल ने मीडिया के माध्यम से जनता और राज्य शासन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि स्वास्थ्य के नाम पर संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा सरकारी धन राशि का बंदरबांट किया जा रहा है। आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित डॉ भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय में वित्तीय वर्ष 2019 – 2020 के कुल आवंटन तथा व्यय की जो जानकारी दी गई है वो शंका के घेरे में है। दी गई जानकारी के अनुसार ₹ 9159094 की राशि को “अन्य व्यय” बताया गया है जिसका आबंटन ₹ 1000000 बताया गया है।

संजीव अग्रवाल ने कहा कि अब विचारणीय प्रश्न यह है कि ₹ 9159094 की सरकारी राशि को “अन्य व्यय” बताया जाना क्या प्रासंगिक है? क्या इतनी बड़ी राशि के खर्च का कोई अता-पता नहीं है? क्या ऐसा संभव है? कदापि नहीं। इसका मतलब यही है कि स्वास्थ्य के नाम पर करोड़ों रुपयों का बंदरबांट किया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के 15 सालों के शासन के दौरान सरकारी अधिकारी पुरी तरह से बेलगाम हो गए हैं। उन्हें प्रदेश की जनता की ज़रा सी भी फ़िक्र नहीं है। जहाँ एक ओर डॉ भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर में इलाज के नाम पर सिर्फ छलावा होता है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य सुरक्षा और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के नाम पर जनता के पैसों की लूट हो रही है।

संजीव अग्रवाल ने शक जताया है कि कदाचित संभव है कि ये भ्रष्ट अधिकारी आज भी भाजपा के इशारे पर सरकारी पैसों की लूट का काम कर रहे हैं। एक ओर जहां डॉ भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय में मरीज़ों का बराबर इलाज नहीं हो रहा है, उन्हें इलाज के नाम पर परेशान किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर मरीज़ों के इलाज के लिए राज्य सरकार द्वारा आबंटित धन राशि का बंदरबांट किया जा रहा है। ये कहीं न कहीं काँग्रेस की भूपेश सरकार को बदनाम करने की बड़ी साज़िश प्रतीत होती है क्योंकि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव सबको मुफ्त में बेहतर इलाज देने की योजना बना कर कार्य कर रहे हैं और ये बेलगाम अधिकारी भाजपा नेताओं के इशारे पर भूपेश सरकार को बदनाम करने की बड़ी साज़िश रच रहे हैं। मैं मुख्यमंत्री से मांग करता हूँ कि इस प्रकार के मामले की उच्चस्तरीय जांच का आदेश दें और दोषियों के ख़िलाफ़ कठोरतम कार्रवाई करें।

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