सरगुजा / हसदेव अरण्य बचाओ आंदोलन का स्वास्थ्य एवं पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव ने खुलकर समर्थन किया है. उन्होंने कहा हैं कि इस आंदोलन में “गोली-डण्डे चले तो पहले मैं गोली खाऊंगा”
पंचायत एवं स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि ग्रामसभा एवं जन सुनवाई हो, वहां उन्हीं लोगों को आने दें जो प्रभावित क्षेत्र का हो. वोटर कार्ड और राशनकार्ड से उन्हें पहचानिए जो आपके क्षेत्र का नहीं उसे भगाइये और यदि उनकी उपस्थिति में ग्रामसभा या जनसुनवाई होती है तो उसका विरोध कीजिये, बहिष्कार कीजिये. ग्रामसभा, जनसुनवाई वहीं हो जो प्रभावित क्षेत्र है, दूसरे क्षेत्र में होता है तो खुल कर बहिष्कार कीजिये. मैं हमेशा आपकी आवाज, आपकी मांग, आपके आंदोलन के साथ हूं.
बता दे कि सिंहदेव धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन में शामिल हुये, यहां उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि” मैं दिल्ली जाकर आप सबकी मंशा, आपकी पीड़ा और हसदेव अरण्य को बचाने की मांग से हमारे नेता राहुल गांधी को अवगत कराऊंगा. उन्होंने पहले भी इस क्षेत्र में आकर इसे बचाने पर जोर दिया था और अभी विदेश में रहते हुए आपके आंदोलनों को जायज बताया है. मैं आपकी बात उन तक पहुंचाऊंगा.”
वन विभाग के उपस्थित कर्मचारियों ने बताया कि खदान के गड्ढों को भरने के बाद अब तक पेड़ नहीं लगाये गए हैं. जिसे लेकर उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि जनता का विरोध है. मैं पूछना चाहता हूं कि विगत दिन जो पेड़ भारी लाव-लश्कर की उपस्थिति में काटे गये, उसके एवज में दुगुना पेड़ कहा लगाया गया. मुझे जरा बतायें. नियम है कि एक एकड़ के बदले दो एकड़ एरिया में पेड़ लगना चाहिए. काटने तो आ गये, लेकिन पेड़ कहा लगा. इसकी जानकारी कौन देगा? गलत जानकारी और गलत आंकड़ा देकर ये सबको भ्रमित कर ग्रामीणों को परेशान कर रहे हैं, यह नहीं चलेगा, नियम और कानून से काम होगा.
जनता दुबारा ग्रामसभा चाहती है कि ग्राम सभा बुलाया जाए और तब फैसला हो. जब जनता ने एक बार कह दिया कि वह ग्रामसभा फर्जी है तो इसे माना जाये. अन्यथा तो उस ग्रामसभा की जांच होनी चाहिए, उनकी भी जांच हो जो जिला पंचायत के प्रस्ताव को दरकिनार कर रहे हैं. ग्राम सभा को वैधानिक बता रहे हैं. जबकि खुद वर्तमान सरपंच सहित पंच बता रहे हैं कि कोई ग्रामसभा की वैधानिकता की जांच के लिए उनका पक्ष लेने नहीं आया, फिर उसे वैधानिक बता कर गलत जानकारी कैसे सार्वजनिक की जा सकती है.
इस दौरान महिलाओं ने कहा कि हम जंगल छोड़कर कहीं नहीं जायेंगे, हमारे पूर्वजों ने यह धरती माता हमें सौंपी है और इसके लिए जान भी देना पड़े तो देंगे हम इसे छोड़ कर कहीं नहीं जाने वाले. वहीं लोगों ने यह भी जानकारी दी की वर्षों से यहां पर रह रहे हैं, वन अधिकार पत्र की मांग कई बार की लेकिन अब तक पट्टा नहीं मिला. लोगों ने बताया कि जब सैकड़ों की संख्या में पुलिस, शासन-प्रशासन की टीम यहां जंगल काटने के लिए पहुंची और हम विरोध कर रहे थे तो हमारे साथ उनका व्यवहार सही नहीं था. महिलाओं को काफी चोट लगी है, किसी का कपड़ा फटा, किसी को दूर फेंका गया, हमारे जंगल में हमें ही नहीं जाने दिया जा रहा था. कोई सरकार और उसके लोग ऐसे कैसे कर सकते हैं. समझ से परे है कि हम संवैधानिक व्यवस्था में हैं या कहीं और हैं. जिसे चुन कर वोट देकर हमने भेजा है वह कैसे हमारे ही खिलाफ खड़ा है. क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी लोगों में काफी नाराजगी देखने को मिली.
सिंहदेव ने बताया कि जब लगभग 8 लाख पेड़ हसदेव क्षेत्र से कटने वाले हैं, ऐसे में यह सोचिए कि जब पहले से जो खदान संचालित है. वह खदान के नियम और शर्तों का ही पूर्ण रूप से पालन नहीं कर रही तो फिर आगे जो ब्लॉक आवंटन हुए हैं, वहां के एक एकड़ पेड़ के बदले दो एकड़ पेड़ लगाने का जो नियम है उसका पालन कहां हो रहा है. परसा-केते की संचालित कोल ब्लॉक के खिलाफ बताया जा रहा है. जशपुर में पौधारोपण कराया गया है. अब जो नई प्रस्तावित खदान है. उसके बदले बताया जा रहा है कि कोरिया में पोधोरोपण किया जायेगा. बर्बाद होगा हसदेव, सरगुजा का एरिया, यहां उजाड़ बना दिया जायेगा और वृक्षारोपण कहीं और होगा. यहां की आबोहवा का क्या, यहां के पर्यावरण का क्या? मैं आम लोगों की जो भी राय है. उसके साथ खड़ा हूं और मेरी व्यक्तिगत राय है कि हमें हसदेव अरण्य को बचाना चाहिए. यह हमारे पर्यावरण एवं स्वच्छ हवा, पानी के लिए जरूरी है.
