तिल्दा-नेवरा। चुनावी मौसम में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, लेकिन इस बार सियासी गलियारों में सनसनी तब मच गई जब एक जनपद प्रत्याशी के अपहरण की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई। दिनभर सस्पेंस बना रहा, लेकिन शाम होते-होते पूरी कहानी “फिल्मी स्क्रिप्ट” जैसी निकली—जिसका क्लाइमैक्स बिल्कुल उल्टा हो गया!
दरअसल, तिल्दा जनपद पंचायत के क्षेत्र क्रमांक 18 से प्रत्याशी टिकेश्वर मनहरे के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता थे योगेश गुरु, जो उनके प्रतिद्वंदी माने जा रहे हैं। मामला दर्ज होते ही राजनीतिक माहौल गर्म हो गया और बीजेपी-कांग्रेस के बीच बयानबाजी शुरू हो गई।
हकीकत कुछ और ही निकली!
टिकेश्वर मनहरे का कहना था कि वे और योगेश गुरु आपसी चुनावी चर्चा कर रहे थे और खुद योगेश गुरु के कहने पर वे उन्हें उनके बड़े भाई आसनदास गुरु के घर छोड़ने गए थे। अब हैरानी की बात यह कि जिसे “अपहृत” बताया जा रहा था, वह खुद आराम से अपने घर बैठा था! जब मामले ने तूल पकड़ा तो आसनदास गुरु ने खुद थाने में बयान देकर साफ किया कि कोई अपहरण हुआ ही नहीं।
बीजेपी का हंगामा, पुलिस की सफाई
जैसे ही यह मामला तूल पकड़ा, बीजेपी नेता वेदराम मनहरे के नेतृत्व में समर्थक थाने पहुंच गए और झूठे मुकदमे को रद्द करने की मांग करने लगे। दूसरी ओर, पुलिस ने भी सफाई देते हुए कहा कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया था, लेकिन अब नए साक्ष्यों के आधार पर जांच की जा रही है।
चुनाव के पहले बढ़ी सियासी गरमी
इस पूरे घटनाक्रम में बीजेपी और कांग्रेस के बीच तलवारें खिंच गई हैं। टिकेश्वर मनहरे ने आरोप लगाया कि यह सब आरंग विधायक गुरु खुशवंत की साजिश है और वे बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि यह मामला सिर्फ चुनावी ड्रामा बनकर रह जाता है या फिर कोई कानूनी मोड़ लेता है। लेकिन एक बात तो तय है—इस चुनावी सीजन में हर दिन एक नया ट्विस्ट देखने को मिलेगा!

