धर्मांतरण, गौ संरक्षण और हिंदी के सम्मान पर रायपुर में शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने रखे तीखे विचार
रायपुर |
पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती इन दिनों छत्तीसगढ़ प्रवास पर हैं। रविवार को राजधानी रायपुर के श्री सुदर्शन शंकराचार्य आश्रम में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने समसामयिक विषयों पर मुखर होकर अपनी बात रखी। देशभर में शादी के बाद हो रही पुरुषों की रहस्यमयी मौतों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा—
“एक दिल के टुकड़े हजार हुए, कोई यहां गिरा कोई वहां गिरा… जो पत्नी पहले पति को मरवा सकती है, वह दूसरे को भी मरवा सकती है – इसकी क्या गारंटी?”
शंकराचार्य ने समाज में नैतिक पतन और रिश्तों में गिरावट को खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि समाज अब भावनाओं से नहीं, स्वार्थ से संचालित हो रहा है, जो एक गंभीर संकट है।
हिंदी का अपमान नहीं सहेंगे
देश में भाषा विवाद पर शंकराचार्य ने स्पष्ट कहा कि—
“महाराष्ट्र और तमिलनाडु के लोग भी दिल्ली पहुंचकर हिंदी में संवाद करते हैं। क्षेत्रीय भाषाओं का सम्मान ज़रूरी है, लेकिन हिंदी का अनादर किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है।”
उन्होंने भारतीय एकता में हिंदी की भूमिका को अनिवार्य बताया और अपील की कि राजनीति से ऊपर उठकर भाषा को राष्ट्र की धरोहर माना जाए।
गौसंरक्षण के लिए सरकार की पहल सराहनीय, लेकिन जागरूकता ज़रूरी
छत्तीसगढ़ सरकार की आदिवासियों को गाय देने की योजना पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यह गौहत्या रोकने और पालन को प्रोत्साहन देने की अच्छी पहल है, लेकिन ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां गाय को अब तक ठीक से पहचाना भी नहीं गया है।
धर्मांतरण पर चिंता, मातृशक्ति की शिक्षा को बताया समाधान
राज्य में बढ़ते धर्मांतरण को लेकर उन्होंने कहा—
“गरीबी और दीनता धर्मांतरण का कारण बन रही है। जब तक मातृशक्ति शिक्षित नहीं होगी, परिवार मजबूत नहीं हो सकता।”
उन्होंने सुझाव दिया कि हर हिंदू को मठ-मंदिरों के लिए प्रति दिन ₹1 अर्पण करना चाहिए, जिससे धार्मिक संस्थाओं के माध्यम से निर्धनों का पालन-पोषण किया जा सके।
