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छत्तीसगढ़ बना सियासी अखाड़ा: मैनपाट में नड्डा तो रायपुर में खड़गे की हुंकार, बयानों से गरमाई राजनीति

रायपुर/अंबिकापुर।
छत्तीसगढ़ की सरज़मीं इन दिनों राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन गई है। एक ओर अंबिकापुर के मैनपाट में बीजेपी का तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर जारी है, जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत पार्टी के दिग्गज नेता मौजूद हैं। तो दूसरी ओर राजधानी रायपुर में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ‘किसान, जवान और संविधान’ जनसभा को संबोधित कर बीजेपी सरकार पर जोरदार हमला बोला।

इस दोहरी मौजूदगी ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है और दोनों दलों के नेता एक-दूसरे पर शब्दबाण चला रहे हैं।

खड़गे बोले – “मोदी दो टांगों पर खड़े, एक हिली तो गिर जाएंगे”

रायपुर में आयोजित कांग्रेस की जनसभा में खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, > “मोदी अब दो टांगों पर खड़े हैं – एक टांग आंध्र प्रदेश की टीडीपी है और दूसरी बिहार के नीतीश कुमार। इनमें से कोई भी हिली, तो मोदी गिर जाएंगे।”

खड़गे ने संविधान और सामाजिक न्याय के सवालों पर भी बीजेपी को घेरा और कहा कि केंद्र सरकार सिर्फ़ कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा दे रही है।

अमरजीत भगत ने कहा – “खड़गे अंबेडकर के अवतार”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने तो खड़गे की तुलना बाबा साहब अंबेडकर से कर डाली।

“खड़गे आज के अंबेडकर हैं, जो संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।”

उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

कांग्रेस में भीतरघात?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किरणमयी नायक ने अमरजीत भगत के बयान से किनारा करते हुए कहा,

“ऐसे बयान ही कांग्रेस की साख को नुकसान पहुंचाते हैं। जनता अब इनसे प्रभावित नहीं होती। हमें आत्ममंथन की ज़रूरत है।”

नड्डा बोले – “बीजेपी में विचारधारा की ट्रेनिंग होती है”

उधर मैनपाट में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, > “बीजेपी एकमात्र ऐसी पार्टी है जहाँ बूथ से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक कार्यकर्ता को विचारधारा की ट्रेनिंग दी जाती है। बाकी पार्टियों में तो लूट-खसोट की ट्रेनिंग होती है।”

बीजेपी नेताओं का मानना है कि मैनपाट का यह प्रशिक्षण शिविर आने वाले निकाय और पंचायत चुनावों की तैयारी का आगाज़ है।


राजनीति के जानकारों का मानना है कि छत्तीसगढ़ आने वाले महीनों में कई स्तरों पर सियासी उथल-पुथल का केंद्र बन सकता है। कांग्रेस और बीजेपी, दोनों ही अपने-अपने रणनीतिक दांव चल चुके हैं, अब देखना होगा कि इसका ज़मीनी असर किसे फायदा पहुंचाता है।

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