राजस्व मंत्री का जवाब — “EOW सक्षम, सभी दोषियों पर होगी कार्रवाई”
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में आज बहुप्रतीक्षित भारतमाला प्रोजेक्ट में हुए कथित घोटाले का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ विधायक धरमलाल कौशिक ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए मामले को सदन में उठाया और कहा कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है, विशेष रूप से बिलासपुर संभाग में।
कौशिक ने आरोप लगाया कि अब तक इस घोटाले में केवल छोटे कर्मचारियों की गिरफ्तारी हुई है जबकि बड़े अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों को बचाया जा रहा है। उन्होंने इसे गंभीर आर्थिक अपराध बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की।
“भारतमाला प्रोजेक्ट में भू-अर्जन के नाम पर करोड़ों रुपए के घोटाले सामने आए हैं। कुछ अफसरों और रसूखदार लोगों ने साजिशन यह खेल खेला है, और अब तक उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यह प्रदेश की जनता के साथ धोखा है,”
इस मुद्दे पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि भारतमाला प्रोजेक्ट एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय योजना है और सरकार भी इसमें हुए भू-अर्जन संबंधी फर्जीवाड़े को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) कर रही है और अब तक कई सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है।
“हमारी ईओडब्ल्यू की टीम पूरी तरह सक्षम है। लगातार जांच और कार्रवाई हो रही है। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा – चाहे वह छोटा अधिकारी हो या बड़ा। घोटाले में जो भी लिप्त हैं, सब लपेटे में आएंगे।”
सरकार ने CBI जांच की मांग को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि राज्य एजेंसियों के माध्यम से ही जांच पूरी की जाएगी।
क्या है भारतमाला परियोजना घोटाला?
भारतमाला प्रोजेक्ट केंद्र सरकार की एक मल्टी-बिलियन इंफ्रास्ट्रक्चर योजना है, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सड़कों का विकास करना है। छत्तीसगढ़ में इस योजना के तहत भू-अर्जन प्रक्रिया में करोड़ों रुपये के हेरफेर के आरोप सामने आए हैं, जिसमें फर्जी दस्तावेज, गलत मुआवजा भुगतान और भूमाफिया की भूमिका जैसे गंभीर मुद्दे उठे हैं।
