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तीन झटकों वाला मानसून सत्र! पुरानी विधानसभा को विदाई, गर्भगृह में धरना और सदन में पर्ची से मची खलबली


रायपुर |

छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र इस बार सियासी मसाले से भरपूर रहा। पांच दिन चले सत्र में कभी गर्भगृह में धरना तो कभी ईडी की पर्ची से सदन में सन्नाटा छा गया और ऊपर से यह विधानसभा का पुराना भवन भी अब इतिहास बनने जा रहा है! कुल मिलाकर इस बार का सत्र ‘तीन झटकों’ के साथ याद रखा जाएगा।


1. अंतिम सलाम! पुरानी विधानसभा को विदाई

बलौदाबाजार रोड के बरौदा गांव में स्थित विधानसभा भवन ने आखिरी सांस ली। अब अगली बैठक सीधे नया रायपुर की हाईटेक इमारत में होगी। संभावना है कि 1 नवंबर को राज्योत्सव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका लोकार्पण करेंगे। यानी अब विधायकों का नया ठिकाना और नया माहौल तैयार है, लेकिन नया रायपुर अभी भी जनता से दूर और बेरौनक है।


2. गर्भगृह में हंगामा और अध्यक्ष की तल्खी

डीएपी खाद की किल्लत पर बिफरे कांग्रेस विधायकों ने सीधे गर्भगृह में मोर्चा खोल दिया। अध्यक्ष रमन सिंह ने जैसे ही निलंबन की घोषणा की, विधायक वहीं जमकर बैठ गए। अध्यक्ष के तेवर तीखे हो गए— बोले “25 साल की परंपरा को ध्वस्त कर रहे हैं, आग्रह की धज्जियां उड़ा दी गईं।” यह शायद पहली बार था जब अध्यक्ष को इतना कड़ा बोलना पड़ा।


3. पर्ची आई, बाप सदन में, बेटा ईडी के घेरे में

शुक्रवार का दिन जैसे सत्र की पटकथा में सबसे ड्रामेटिक मोड़ लेकर आया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सदन में सवालों का सामना कर रहे थे, उधर ईडी उनके बेटे चैतन्य बघेल के घर पहुंच चुकी थी। उसी दिन चैतन्य का जन्मदिन भी था! सदन के बीच एक कर्मचारी भूपेश बघेल को एक पर्ची थमा गया— कहा जाता है इसी में गिरफ्तारी की सूचना थी। बघेल ने पर्ची नेता प्रतिपक्ष महंत को पकड़ा दी और फिर कांग्रेस विधायकों ने कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया।


विधानसभा में कौन चमका? ‘चौधरी साहब’

हाउसिंग बोर्ड पर उठे सवालों के जवाब जिस सिलसिलेवार अंदाज़ में आवास मंत्री ओ.पी. चौधरी ने दिए, उससे वे इस सत्र के ‘स्टार परफॉर्मर’ बन गए। भारी हंगामे के बीच उनके जवाबों की गूंज न सिर्फ सदन में, बल्कि मीडिया के पन्नों में भी बराबरी से सुनाई दी।


बस्तर से उठा दर्द भरा सवाल

बीजेपी विधायक किरण सिंह देव और लता उसेंडी ने बस्तर के नाम पर अपने ही मंत्रियों से तीखे सवाल पूछे। सीएसआर फंड से काम न होना, स्वास्थ्य विभाग की गड़बड़ियां— इन सवालों में बस्तर का उपेक्षित दर्द साफ छलका।


पीएम आवास बना सत्र और सड़क का मुद्दा

नेता प्रतिपक्ष महंत ने सदन में पीएम आवास योजना में धांधली के आरोप लगाए, तो अगले ही दिन रायपुर के कचना क्षेत्र में पीएम आवास के रहवासियों ने निगम मुख्यालय घेर लिया। बोले— “सिर्फ दीवारें बनाई गईं, सड़क-नाली भगवान भरोसे हैं।”



तो कुल मिलाकर… पुरानी इमारत में हंगामों का आखिरी सत्र, अध्यक्ष की तल्ख़ी, विपक्ष की नाराज़गी और चुपचाप पहुंची ईडी की दस्तक— मानसून सत्र 2025 ने राजनीति का तापमान जमकर बढ़ाया। अब सबकी नजरें नए भवन और उसमें होने वाले शीतकालीन सत्र पर टिकी हैं।


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