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बिना अनुमति पंडाल पर हाईकोर्ट सख्त: शासन से मांगा जवाब, कहा- नई गाइडलाइन तक पुराना आदेश ही लागू रहेगा


रायपुर/बिलासपुर, 21 जुलाई।
त्योहारी सीजन में सड़कों पर बगैर अनुमति पंडाल, स्वागत द्वार और धार्मिक आयोजन करने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की युगल पीठ ने सोमवार को जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक शासन नई गाइडलाइन नहीं लाता, तब तक पूर्व में जारी गाइडलाइन ही लागू रहेगी।

राज्य शासन ने कोर्ट से अतिरिक्त समय मांगा और कहा कि नई गाइडलाइन विभिन्न विभागों के समन्वय से तैयार की जा रही है, जिसमें कुछ समय और लगेगा। इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई तक के लिए पुरानी व्यवस्था को ही लागू रखने का निर्देश दिया है।

क्या है वर्तमान में लागू गाइडलाइन?

22 अप्रैल 2022 को गृह (पुलिस) विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, किसी भी सार्वजनिक, धार्मिक, राजनीतिक या सामाजिक आयोजन के लिए जिला प्रशासन से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि आयोजन से पहले आयोजकों को निर्धारित प्रारूप में आवेदन देकर घोषणा पत्र जमा करना होगा। यह प्रक्रिया इसलिए जरूरी है ताकि यातायात, सुरक्षा और बाजार व्यवस्था बाधित न हो और प्रशासनिक नियंत्रण बना रहे।

क्या कहता है याचिकाकर्ता का पक्ष?

याचिका रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने दाखिल की है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022, 2023 और 2024 के गणेशोत्सव एवं दुर्गा उत्सव के दौरान रायपुर शहर में सैकड़ों स्थानों पर पंडाल लगे, लेकिन इनमें से किसी को भी न कलेक्टर कार्यालय से अनुमति मिली और न नगर निगम से। दोनों संस्थाओं ने उन्हें लिखित में इसकी जानकारी दी है।

उन्होंने कोर्ट में कहा कि त्योहारी सीजन में शहर की सकरी सड़कों पर अवैध पंडाल और स्वागत द्वार लगाकर रास्ते जाम कर दिए जाते हैं, जिससे आम नागरिकों को काफी परेशानी होती है। उन्होंने इस पर रोक लगाने और सख्त गाइडलाइन लागू करने की मांग की है।

अगली सुनवाई में क्या होगा?

कोर्ट ने शासन को जल्द से जल्द नई गाइडलाइन तैयार कर पेश करने के निर्देश दिए हैं। तब तक 2022 की गाइडलाइन ही मान्य मानी जाएगी। अगली सुनवाई की तारीख शासन की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर तय होगी।



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