EOW की कार्यप्रणाली पर फिर छाया संदेह, वरिष्ठ अधिवक्ता ने लगाए गंभीर आरोप
रायपुर, 10 अक्टूबर 2025।
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल और डीएमएफ (जिला खनिज निधि) घोटाले से जुड़ा मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण संगठन) के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
जानकारी के मुताबिक, घोटाले के एक प्रमुख आरोपी निखिल चंद्राकर का बयान दर्ज करने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता सामने आई है।
अदालत के बाहर टाइप हुआ आरोपी का बयान
मामले से जुड़े दस्तावेज़ों की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि आरोपी निखिल चंद्राकर का बयान, जो कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के अंतर्गत न्यायालय में दर्ज होना चाहिए था, उसे अदालत के बाहर किसी निजी कंप्यूटर पर टाइप करवाया गया।
नियम के अनुसार, ऐसे बयानों का टाइपिंग और हस्ताक्षर कार्य अदालत परिसर में न्यायिक अधिकारी की मौजूदगी में ही होना चाहिए, ताकि उसकी प्रामाणिकता पर संदेह न रहे। लेकिन इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत कार्रवाई किए जाने का आरोप है।
बचाव पक्ष की हाईकोर्ट में शिकायत
इस गड़बड़ी का खुलासा होने के बाद बचाव पक्ष के वकीलों ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि EOW ने जानबूझकर न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया और जांच को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश की।
वरिष्ठ अधिवक्ता फैजल रिजवी ने लगाए गंभीर आरोप
वरिष्ठ अधिवक्ता फैजल रिजवी ने इस मामले में सबूतों से छेड़छाड़, न्यायालय को गलत जानकारी देने और फर्जी दस्तावेज़ प्रस्तुत करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ प्रक्रिया में त्रुटि नहीं बल्कि न्यायिक प्रणाली के साथ खिलवाड़ है।
रिजवी ने मामले की फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बयान टाइपिंग का कार्य कहां और किसके निर्देश पर हुआ।
अधिकारियों के खिलाफ शिकायत
इस पूरे मामले में एसीबी के आईजी अमरेश मिश्रा, एएसपी चंदेश ठाकुर और डीएसपी राहुल शर्मा के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज की गई है। शिकायत में कहा गया है कि इन अधिकारियों की निगरानी में ही आरोपी का बयान दर्ज करवाया गया था।
अदालत ने मांगा स्पष्टीकरण
न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी अधिकारियों को 25 अक्टूबर 2025 तक अदालत में पेश होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने यह भी कहा है कि यदि फॉरेंसिक जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होती है तो आरोपियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जांच एजेंसियों में हड़कंप
मामले के सामने आने के बाद EOW और ACB के भीतर हड़कंप मच गया है। उच्च न्यायालय और सतर्कता विभाग दोनों ने प्रकरण का संज्ञान ले लिया है।
राज्य सरकार भी मामले की रिपोर्ट तलब करने की तैयारी में है।
इस खुलासे ने छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित वित्तीय घोटालों में से एक को नई दिशा दे दी है —
अब सवाल यह है कि क्या यह “फर्जी बयान” एक बड़ी साजिश का हिस्सा था, या फिर प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा?
जवाब अदालत की जांच में सामने आएंगे।
