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विधानसभा में गूंजा दुर्ग की अफीम खेती का मामला, सत्ता-विपक्ष में तीखा टकराव


रायपुर। दुर्ग जिले में कथित अफीम की खेती का मामला सोमवार को विधानसभा के शून्यकाल में जोरदार तरीके से उठा। इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” से “अफीम का कटोरा” बनाने की कोशिश की जा रही है और इस पूरे मामले में राजनीतिक संरक्षण का संदेह है।


नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सदन में कहा कि राजधानी से करीब 50 किलोमीटर दूर एक व्यक्ति की निजी जमीन पर अफीम की खेती की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह काम सामूहिक संरक्षण में हो रहा है और इसकी जांच के लिए विधायकों का दल बनाकर तथा किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए।


पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यह घटना होली से ठीक पहले सामने आई थी। गांव के लोग लकड़ी इकट्ठा करने गए थे, तभी चने के खेत के बीच अफीम की खेती दिखाई दी। उन्होंने कहा कि कलेक्टर खुद विनायक ताम्रकार के खेत में अफीम की खेती होने की बात कह रहे हैं, लेकिन एफआईआर में मुख्य आरोपी के रूप में नौकर को बनाया गया है, जबकि असली आरोपी का नाम तीसरे नंबर पर है।


भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि एफआईआर को जानबूझकर कमजोर बनाया गया है। इसमें न तो जमीन का रकबा स्पष्ट है और न ही यह बताया गया है कि जमीन किसके नाम पर है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर विनायक ताम्रकार को क्यों बचाया जा रहा है।


वहीं, संसदीय कार्य मंत्री अजय चंद्राकर ने पलटवार करते हुए कहा कि यह खेती आज की नहीं बल्कि पिछले चार वर्षों से चल रही है और इस मामले में कांग्रेस भी शामिल रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों में सच्चाई नहीं है।


कांग्रेस की विधायक संगीता सिन्हा ने भी इस मामले को शर्मनाक बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की। इसके अलावा विक्रम मंडावी, दलेश्वर साहू, लखेश्वर बघेल, कुंवर सिंह निषाद, द्वारिकाधीश यादव और उमेश पटेल सहित कई कांग्रेस विधायकों ने भी सदन में यह मुद्दा उठाया।
मामले को लेकर सदन में काफी देर तक हंगामा चलता रहा। विपक्ष ने पूरे प्रदेश में जांच कर यह पता लगाने की मांग की कि कहीं जंगलों या फार्महाउसों में भी अफीम की खेती तो नहीं हो रही।

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