रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को धान खरीदी के मुद्दे पर जोरदार हंगामा देखने को मिला। बस्तर संभाग के किसानों का धान नहीं खरीदे जाने का आरोप लगाते हुए विपक्ष ने सरकार को घेरा और मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन कर दिया।
प्रश्नकाल के दौरान विधायक Lakheshwar Baghel ने वर्ष 2025-26 में हुई धान खरीदी और उसके उठाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि किसान लगातार एसडीएम कार्यालय और अन्य सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं और धान खरीदी में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि कितने किसानों को वनाधिकार पट्टा मिला है और कितने किसान ऋणधारी हैं।
जवाब में खाद्य मंत्री Dayaldas Baghel ने बताया कि बस्तर संभाग के जिलों में बड़ी मात्रा में धान का उठाव हुआ है। उनके अनुसार बस्तर में 46,846.86, बीजापुर में 21,888.59, दंतेवाड़ा में 9,757, कांकेर में 1,47,528.3, कोंडागांव में 58,911.78, नारायणपुर में 17,383.06 और सुकमा में 16,608.14 क्विंटल धान का उठाव किया गया है। मंत्री ने कहा कि इस वर्ष अब तक सबसे अधिक धान की खरीदी हुई है।
इस दौरान कांग्रेस विधायक Kawasi Lakhma ने भी सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि बस्तर संभाग के पांच जिलों में आदिवासी किसानों का धान नहीं खरीदा गया। उन्होंने कहा कि करीब 32 हजार 200 किसानों ने पंजीयन कराया था, लेकिन सैकड़ों टोकनधारी किसान धान नहीं बेच पाए। इससे किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने भी सरकार से सवाल करते हुए पूछा कि कितने ऐसे किसान हैं जिनका टोकन कटने के बाद भी धान नहीं खरीदा गया और कितने किसान ऋणधारी हैं। उन्होंने सरकार से स्पष्ट जानकारी देने की मांग की।
मंत्री दयालदास बघेल ने जवाब में कहा कि जो किसान धान खरीदी केंद्र तक धान लेकर पहुंचे, उनका धान खरीदा गया है। जो किसान केंद्र तक नहीं पहुंचे, उनका धान खरीदा जाना संभव नहीं था।
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी विधायकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और विरोध जताते हुए सदन से बहिर्गमन कर दिया। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
