रायपुर। विधानसभा के प्रश्नकाल में गुरुवार को छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत संचालित व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों, कौशल उन्नयन और निगरानी व्यवस्था को लेकर सदन में तीखी बहस देखने को मिली। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने योजना के क्रियान्वयन, आंकड़ों में विसंगति और राज्य की अलग कौशल नीति नहीं होने के मुद्दे पर सरकार को घेरा।
कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने सदन में जानकारी देते हुए बताया कि 31 जनवरी 2025 की स्थिति में प्रदेश में 364 व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान पंजीकृत हैं। इनमें से 171 संस्थानों द्वारा 70 अलग-अलग ट्रेड में प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन संस्थानों के माध्यम से अब तक 19 हजार 934 युवाओं का कौशल उन्नयन किया गया है।
मंत्री ने बताया कि इन प्रशिक्षण संस्थानों की निगरानी जिला विकास प्राधिकरण द्वारा की जाती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि प्रदेश में स्किल्ड और अनस्किल्ड श्रमिकों के प्रतिशत से जुड़ी जानकारी सरकार के पास उपलब्ध नहीं है।
मंत्री के अनुसार कौशल उन्नयन कार्यक्रम के लिए 184 संस्थानों को 27 करोड़ 30 लाख 37 हजार 543 रुपये की राशि का भुगतान किया जाना था, जिसमें से अब तक 24 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है।
आंकड़ों में विसंगति पर सरकार से जवाब तलब
मंत्री के जवाब पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने आंकड़ों में विसंगति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार बता रही है कि 171 संस्थान प्रशिक्षण दे रहे हैं, लेकिन भुगतान 184 संस्थानों को किया जा रहा है। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाए कि अतिरिक्त संस्थानों को भुगतान किस आधार पर किया गया।
चंद्राकर ने यह भी कहा कि सरकार कह रही है कि स्किल्ड और अनस्किल्ड लोगों का कोई सर्वे नहीं है, जबकि राज्य के विजन डॉक्यूमेंट-2027 में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि प्रदेश में केवल 3 प्रतिशत लोग प्रशिक्षित हैं और 97 प्रतिशत लोग अनस्किल्ड हैं। उन्होंने पूछा कि जब सरकार के पास सर्वे नहीं है तो ये आंकड़े दस्तावेज में कैसे आए।
कौशल नीति बनाने की मांग
विधायक चंद्राकर ने सदन में यह भी सवाल उठाया कि प्रदेश में कौशल विकास के प्रशिक्षण आवासीय हैं या गैर-आवासीय, आउटसोर्सिंग के जरिए प्रशिक्षकों को लाने का क्या मानदंड है और क्या राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के लिए अलग कौशल उन्नयन नीति बनाने जा रही है।
उन्होंने कहा कि देश में करीब 87 प्रतिशत लोग अनस्किल्ड हैं, जबकि छत्तीसगढ़ में यह आंकड़ा 97 प्रतिशत बताया जा रहा है। ऐसे में राज्य में कौशल विकास की मजबूत नीति, निगरानी व्यवस्था, नियोजन और ट्रेड चयन की स्पष्ट प्रणाली बनाने की जरूरत है।
सुझावों पर अमल का भरोसा
इस पर जवाब देते हुए कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि केंद्र सरकार से मिलने वाले लक्ष्यों और स्थानीय मांग के आधार पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का चयन किया जाता है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर के सुझावों पर सरकार अमल करने का प्रयास करेगी।
मंत्री ने बताया कि प्रशिक्षण संस्थानों की निगरानी के लिए 90 दिन की समय-सीमा तय है और यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है तो भुगतान रोकने की भी व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में सरकार ने प्रशिक्षण व्यवस्था में सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं और आगे भी इसे और बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।
