दंतेवाड़ा |
दंतेवाड़ा से नगरनार (जगदलपुर) तक बिछाई जा रही NMDC की लौह अयस्क पाइपलाइन परियोजना अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। विकास की रफ्तार के नाम पर जहां हजारों पेड़ों की कटाई की गई है, वहीं उनकी भरपाई को लेकर वन विभाग के तर्क सवालों के घेरे में हैं। दूसरी ओर परियोजना के कारण एक किसान की आजीविका भी संकट में पड़ गई है।
हजारों पेड़ कटे, भरपाई 500 किमी दूर
किरंदुल से नगरनार प्लांट तक पाइपलाइन बिछाने के लिए जंगल के हजारों पेड़ों को काट दिया गया। नियमों के अनुसार इन पेड़ों की भरपाई उसी क्षेत्र में वृक्षारोपण कर की जानी चाहिए थी, लेकिन वन विभाग ने दंतेवाड़ा में ऐसा करने में असमर्थता जताई है।
विभाग का कहना है कि दंतेवाड़ा की मिट्टी पथरीली है और यहां पौधों के जीवित रहने की संभावना कम है। साथ ही वृक्षारोपण के लिए पर्याप्त जमीन भी उपलब्ध नहीं है।
इसी वजह से कटे हुए पेड़ों के बदले लगभग 500 किलोमीटर दूर सरगुजा संभाग के बलरामपुर जिले में करीब 5 हजार पौधे लगाने की योजना बनाई गई है।
हालांकि स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यह केवल कागजी खानापूर्ति है, क्योंकि दंतेवाड़ा के पारिस्थितिकी तंत्र को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई दूसरे जिले में पौधे लगाकर नहीं की जा सकती।
किसान के 5 तालाब उजड़े
पाइपलाइन परियोजना की जद में केवल जंगल ही नहीं आए, बल्कि किसानों की आजीविका भी प्रभावित हुई है। एक स्थानीय किसान के पांच मछली पालन तालाबों को बिना पूर्व सूचना के पाइपलाइन कार्य के दौरान खोद दिया गया।
20 लाख का नुकसान, कर्ज चुकाने की चिंता
पीड़ित किसान के अनुसार तालाबों में लाखों रुपये की मछलियां और पूंजी लगी हुई थी, जो पूरी तरह नष्ट हो गई। किसान का कहना है कि इस घटना से उसे करीब 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
किसान का कहना है कि
“मेरे पांचों तालाब पूरी तरह खत्म कर दिए गए। बैंक का कर्ज है और अब परिवार का पालन-पोषण करना भी मुश्किल हो गया है।”
मुआवजे पर चुप्पी
किसान का आरोप है कि तालाबों को नष्ट करने से पहले न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही मुआवजे की कोई जानकारी दी गई।
अब सवाल उठ रहा है कि विकास परियोजना के नाम पर हुई पर्यावरणीय क्षति और किसान के नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा। क्या संबंधित विभाग और NMDC इसकी भरपाई करेंगे या दंतेवाड़ा की मिट्टी को पथरीली बताकर जिम्मेदारी से बचा जाएगा।
