रायपुर। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से निकलने वाले उपचारित पानी के दोबारा उपयोग को लेकर नगरीय प्रशासन विभाग ने पहल तेज कर दी है। सूडा ने निकायों को एसटीपी के 50 किलोमीटर के दायरे में संभावित उपयोगकर्ताओं की पहचान करने के निर्देश दिए हैं।
इसके तहत थर्मल पावर प्लांट, उद्योग, रेलवे, शासकीय विभाग और अन्य संस्थानों से संपर्क कर उनकी पानी की जरूरत का आकलन किया जाएगा। संबंधित निकायों को यह जानकारी 15 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने को कहा गया है।
स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 और मिशन अमृत 2.0 के तहत राज्य के छह नगर निगमों में कुल 338 एमएलडी क्षमता के एसटीपी निर्माणाधीन हैं। इनमें बीरगांव 55 एमएलडी, भिलाई-चरौदा 13, भिलाई 150, दुर्ग 47, अंबिकापुर 32 और राजनांदगांव 41 एमएलडी क्षमता के प्लांट शामिल हैं।
सूडा के मुताबिक, केंद्र की टैरिफ पॉलिसी-2016 और एनजीटी के निर्देशों के अनुरूप एसटीपी के आसपास उपचारित पानी के पुन: उपयोग की संभावनाएं तलाशने की कवायद की जा रही है। मकसद है कि प्लांट शुरू होते ही उपचारित पानी की खपत के लिए उपयोगकर्ता पहले से चिन्हित रहें।
