रायपुर।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का सबसे बड़ा दफ्तर राजीव भवन सोमवार को किसी रणभूमि से कम नहीं रहा। अंदर बैठक, बाहर बहस—कुछ यूं हुआ सियासी तमाशा कि नेताओं से ज्यादा चर्चा गेट पर हुए हंगामे की हो गई।
सबसे पहले एंट्री को लेकर विधायक द्वारिकाधीश यादव का पारा हाई हो गया। जैसे ही वो बैठक में जाने पहुँचे, सेवा दल के कार्यकर्ताओं ने उन्हें रोक लिया—बस फिर क्या था! द्वारिकाधीश जी ने वही किया जो नेता आमतौर पर कैमरे के सामने करते हैं—जमकर नाराज़गी, ऊँची आवाज़ और तीखे सवाल:
“मैं विधायक हूं, मुझे कौन रोक रहा है?”

गेट हुआ बंद, अंदर-बाहर दोनों तरफ गर्मी
राजीव भवन के भीतर पहले से बैठे वरिष्ठ नेता शायद बिना गर्मी के पसीने में थे, लेकिन बाहर की गरमी और भी तीखी थी।
गेट बंद कर दिया गया, और बाहर खड़े जिला अध्यक्ष व कार्यकर्ता गेट पर भिड़ने लगे। अंदर घुसने की होड़ में धक्का-मुक्की का माहौल बना रहा, किसी ने कहा – “बैठक की जगह तो ये लगता है अखाड़ा!”
नेताओं से ज्यादा सिक्योरिटी एक्टिव
सिक्योरिटी गार्ड्स ने किसी क्रिकेट मैच की तरह मोर्चा संभाला। कार्यकर्ता भीतर जाने को बेताब थे और गार्ड्स उन्हें रोकने को तत्पर। “बैठक VIP की है, आम कार्यकर्ताओं को बाद में बुलाया जाएगा” – इस ऐलान से भीड़ और भड़की।
राजीव भवन में अंदर शांति, बाहर हंगामा
अंदर कांग्रेस नेतृत्व आगामी रणनीति पर बात कर रहा था, और बाहर कार्यकर्ता पूछ रहे थे – “हमें क्यों नहीं बुलाया गया?”
इस पूरे हंगामे ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है—क्या कांग्रेस में संगठन की ताकत गेट पर ही अटक गई है?
