नक्सलवाद के बाद शांति के रास्ते पर बढ़ रहा बस्तर, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्टार्टअप और पर्यटन पर 360° विकास योजना
रायपुर/नई दिल्ली, 7 अप्रैल।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने मंगलवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री Narendra Modi से मुलाकात कर बस्तर क्षेत्र के समग्र और तेज़ विकास के लिए तैयार ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ का विस्तृत ब्लूप्रिंट सौंपा। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को मानसून के बाद बस्तर आने का न्योता भी दिया, जहां उनके प्रस्तावित दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण की योजना है।
मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री को बताया कि राज्य में नक्सलवाद के अंत के बाद बस्तर अब शांति, विश्वास और विकास के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि अब सरकार का लक्ष्य बस्तर को देश के विकास मानचित्र पर नई पहचान दिलाना और इसे आत्मनिर्भर, सशक्त और अवसरों से भरपूर क्षेत्र के रूप में विकसित करना है।
360 डिग्री विकास की रणनीति
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को जानकारी दी कि ‘बस्तर 2.0’ के तहत बस्तर क्षेत्र में विकास की व्यापक रणनीति तैयार की गई है, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्टार्टअप और पर्यटन जैसे सभी क्षेत्रों को शामिल किया गया है। यह योजना “सैचुरेशन, कनेक्ट, फैसिलिटेट, एम्पावर और एंगेज” की रणनीति पर आधारित है, जिसके तहत हर गांव तक सरकारी योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं को पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
सड़क, रेल और एयर कनेक्टिविटी को मिलेगा विस्तार
बस्तर क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सड़क और पुलों का बड़ा नेटवर्क विकसित करने की योजना है। इसके तहत 228 नई सड़कों और 267 पुलों का निर्माण प्रस्तावित है, जबकि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधूरे कार्यों को वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन परियोजना को गति देने और जगदलपुर एयरपोर्ट के विस्तार का प्रस्ताव भी रखा गया है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से बस्तर में आवागमन और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े प्रोजेक्ट
बस्तर क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि दंतेवाड़ा की तर्ज पर ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है। इसके अलावा जगदलपुर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और गीदम में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।
सिंचाई परियोजनाओं से कृषि को मिलेगा बल
कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार बैराज जैसी बड़ी सिंचाई परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इन परियोजनाओं से करीब 31 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की संभावना है, जिससे बस्तर की कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
ग्रामीण आय बढ़ाने की योजना
राज्य सरकार ने बस्तर क्षेत्र के ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के लिए भी विशेष योजना तैयार की है। इसके तहत अगले तीन वर्षों में 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए आजीविका क्लस्टर विकसित किए जाएंगे और लोगों को एनआरएलएम, सहकारी समितियों, एफपीओ और वनधन केंद्रों से जोड़ा जाएगा।
‘नियद नेल्ला नार’ योजना का विस्तार
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास को गति देने के लिए शुरू की गई ‘नियद नेल्ला नार योजना’ के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। तीसरे पक्ष के मूल्यांकन के अनुसार 93 प्रतिशत गांवों में प्राथमिक स्कूल उपलब्ध हैं, 97 प्रतिशत गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं और 89 प्रतिशत ग्रामीणों के आयुष्मान कार्ड बन चुके हैं।
प्रधानमंत्री ने इस योजना की सराहना करते हुए कहा कि इससे दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को बुनियादी सुविधाएं मिल रही हैं और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।
पर्यटन को मिलेगा वैश्विक पहचान
बस्तर को पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने के लिए राज्य सरकार कई योजनाओं पर काम कर रही है। इसके तहत Chitrakote Falls, Tirathgarh Falls और Kanger Valley National Park जैसे पर्यटन स्थलों को एडवेंचर टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। साथ ही कैनोपी वॉक, ग्लास ब्रिज और अन्य पर्यटन परियोजनाओं की भी योजना है।
पीएम को दी सांस्कृतिक विरासत की भेंट
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री मोदी को छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय परंपरा को दर्शाती बेल मेटल से निर्मित ‘माता कौशल्या के राम’ की कलाकृति भेंट की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ वह पावन भूमि है जिसे भगवान श्रीराम का ननिहाल माना जाता है और यह कलाकृति प्रदेश की आस्था, संस्कृति और शिल्प परंपरा का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में बस्तर का विकास नई गति पकड़ेगा और यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में शांति, समृद्धि और विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनकर उभरेगा।
