कच्चे तेल, परिवहन और पैकेजिंग लागत बढ़ने से उपभोक्ताओं पर महंगाई की मार
रायपुर/नई दिल्ली। जीएसटी दरों में कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक लंबे समय तक नहीं टिक सका। बीते 90 दिनों में रोजमर्रा के उपयोग की अधिकांश वस्तुओं के दाम बढ़ गए हैं। आंकड़ों के अनुसार 54 प्रमुख वस्तुओं में से 41 के दाम सितंबर 2025 की तुलना में बढ़े हैं, जिससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका-ईरान तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल के दामों और परिवहन लागत पर पड़ा है। साथ ही प्लास्टिक, पॉलीथिन और अन्य पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में 70 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे कई उत्पादों की उत्पादन लागत बढ़ गई है।
महंगाई का असर इलेक्ट्रॉनिक्स, निर्माण सामग्री, डेयरी और किराना उत्पादों पर साफ दिखाई दे रहा है। एसी, टीवी, मॉनिटर, फ्रिज, डिस्पोजेबल उत्पादों समेत कई उपभोक्ता वस्तुएं महंगी हुई हैं। वहीं चीज़, बादाम और अन्य खाद्य उत्पादों के दामों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
एफएमसीजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां जैसे Dabur, Britannia Industries और Hindustan Unilever ने भी लागत बढ़ने का हवाला देते हुए उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के संकेत दिए हैं।
सबसे ज्यादा महंगे हुए सामान
सीमेंट: ₹365 से बढ़कर ₹410
एसी: ₹34,490 से बढ़कर ₹39,765
मॉनिटर: ₹7,500 से बढ़कर ₹7,900
55 इंच टीवी: ₹59,990 से बढ़कर ₹62,290
चीज़: ₹600 से बढ़कर ₹650 प्रति किलो
बादाम: ₹800 से बढ़कर ₹900 प्रति किलो
महंगाई बढ़ने के प्रमुख कारण
कच्चे तेल और नैफ्था की कीमतों में उछाल
प्लास्टिक और पैकेजिंग सामग्री की बढ़ी लागत
डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी
बिजली, डीजल और परिवहन खर्च में वृद्धि
