SPL की कोयले में मिलावट को बताया गैर-कानूनी, केंद्र ने कहा— नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
रायपुर/नई दिल्ली, 20 जुलाई। रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा में एल्युमिनियम उद्योगों से निकलने वाले अति-विषैले अपशिष्ट ‘स्पेंट पॉट लाइनिंग’ (SPL) के अवैध निपटान और वाणिज्यिक कोयले में इसकी कथित मिलावट का गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने इस अवैध गतिविधि से पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा।
बृजमोहन अग्रवाल ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से पूछा कि औद्योगिक इकाइयों द्वारा वाणिज्यिक कोयले में विषैले SPL की मिलावट रोकने, सीमेंट उद्योगों में इसके सुरक्षित निपटान तथा नियमों के उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर क्या कार्रवाई की गई है। उन्होंने एल्युमिनियम उत्पादक कंपनियों की जवाबदेही तय करने और संयंत्रों के आसपास रहने वाले लोगों के स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्तवर्धन सिंह ने लोकसभा में जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि वाणिज्यिक कोयले में SPL की मिलावट पूरी तरह गैर-कानूनी है। उन्होंने बताया कि खतरनाक एवं अन्य अपशिष्ट (प्रबंधन तथा सीमापार परिवहन) नियम, 2016 के तहत SPL को अति-खतरनाक अपशिष्ट घोषित किया गया है और इसका निपटान केवल अधिकृत रीसाइक्लर्स या TSDF सुविधाओं के माध्यम से ही किया जा सकता है।
सरकार ने बताया कि नियमों के उल्लंघन की स्थिति में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB) को संबंधित इकाइयों को बंद करने, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने और आपराधिक कार्रवाई करने का अधिकार है। साथ ही, 1 अप्रैल 2026 से एल्युमिनियम उत्पादकों के लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) व्यवस्था लागू कर दी गई है, जिसके तहत कंपनियों को CPCB के डिजिटल पोर्टल पर पंजीकरण कर विषैले कचरे के सुरक्षित निपटान की जिम्मेदारी निभानी होगी।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे औद्योगिक राज्य में विकास जरूरी है, लेकिन पर्यावरण और नागरिकों के स्वास्थ्य से समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एल्युमिनियम संयंत्रों, तृतीय पक्ष विक्रेताओं और सीमेंट भट्टियों की कड़ी निगरानी तथा नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
