00 सूचना का अधिकार पर हुआ खूलासा
00 अधिकारियों के कागजी खानापूर्ति के कारण बहुचर्चित यूटीआई घोटाले का जांच अटका
कोरिया / जिले के नगरीय क्षेत्र चिरमिरी निगम का बहुचर्चित यूटीआई घोटाला मामला काफी समय से अधिकारियों के कागजी खानापूर्ति में अटका हुआ है। चिरमिरी पुलिस द्वारा अावश्यक जांच कर अपराध प्रमाणित पाये जाने पर छ0ग0 विधि व विधायी कार्य विभाग को अभियोजन की स्वीकृति के लिए जुलाई 2015 में आवेदन भेजा गया था। विधि विभाग द्वारा आवेदन वापस कर दिया गया। फिर चिरमिरी पुलिस द्वारा पुनः दिसम्बर में विधि विभाग को आवेदन भेजा गया है। जिसमें अब तक अभियोजन का अादेश मिलना बाकी है। ज्ञात हो की नगर निगम चिरमिरी में यु0टी0आई0 घोटाला 2010 को अंजाम किया गया। इस घोटाले में गौरव पथ का पैसा शेयर मार्केट यु0टी0आई 0 में महापौर के कहने पर निवेश कर दिया गया था।
क्या मांगा था जानकारी – आरटीआई कार्यक्रता राजकुमार मिश्रा ने पुलिस अधीक्षक कोरिया के लोक सूचना अधिकारी से सूचना का अधिकार पर जारकारी मांगा कि चिरमिरी थाना में अपराध सं.319/2013 में आरोपी चिरमिरी निगम का पूर्व महापौर डम्बरू बेहरा, प्रभारी आयुक्त प्रमोद शुक्ला व आर.पी. सोनकर के विरूद्ध विधि विभाग को अभियोजन की स्वीकृति के लिए आवेदन कब भेजा गया इससे संबंधित समस्त दस्तावेजों की सत्यप्रति प्रदान करें। लोक सूचना अधिकारी द्वारा जानकारी प्रदान नही करने पर आरटीआई कार्यक्रता राजकुमार मिश्रा ने पुलिस अधीक्षक कोरिया को प्रथम अपील किया। पुलिस अधीक्षक द्वारा जानकारी दिलवाया गया।
क्या जानकारी अाया – इस जानकारी में बताया गया कि चिरमिरी पुलिस द्वारा दिनांक 10.07.2015 को अभियोजन की स्वीकृति के लिए विधि विभाग को पत्र लिखा गया है। इस पत्र में लिखा गया है कि चिरमिरी मे गौरव पथ निर्माण हेतु प्राप्त राशी से चिरमिरी के तात्कालिक महापौर डम्बरू बेहरा व प्रभारी आयुक्तों के द्वारा 2.5 करोड़ की राशी से यूटीआई का शेयर खरीद लिया गया था। न्यायालय के अादेश से चिरमिरी थाना में उक्त आरोपीयों के विरूद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 34 के तहत अपराध दर्ज किया गया था। इस प्रकार अनुसंधान में अभियुक्त डम्बरू बेहरा द्वारा शासकीय धन को यूटीआई का एजेंट होने के कारण लाभ प्राप्त किया गया है। संपूर्ण जांच में शासन को अर्थिक क्षति पहुंचाया गया है जिससे 409, 120 ब व 34 का अपराध प्रमाणित पाया गया है। प्रकरण के मुख्य अभियुक्त डम्बरू बेहरा, प्रमोद शुक्ला थाना आर.पी. सोनकर के विरूद्ध राज्य सरकार द्वारा जांच कर आर्थिक क्षति के वसूली के लिए कार्यवाही किया गया है। उक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए प्रकरण में अभियुक्तों के विरूद्ध अभियोजन की स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया गया है।
लेटलतीफी जारी – विधि विभाग द्वारा चिरमिरी पुलिस को दिनांक 22.09.2015 एक पत्र लिख कर जानकारी मांगा गया कि अभियुक्तों का नियुक्तिकर्ता पद से च्युक्त करने का अधिकार किसके पास है। चिरमिरी पुलिस द्वारा दिनांक 05.12.2015 को यह जानकारी बनाकर विधि विभाग को भेजा जा चुका है परन्तु विधि विभाग द्वारा अब तक आरोपियों के विरूद्ध अभियोजन की स्वीकृति प्रदान नही किया गया है। इस प्रकार अधिकारियों के कागजी खानापूर्ति के आधार पर चिरमिरी निगम का बहुचर्चित यूटीआई घोटाला अटका पड़ा है।
क्या कहता है नियम – इस संबंध में अाईटीआई कार्यक्रता राजकुमार मिश्रा का कहना है कि न्यायालय के दिशा निर्देशो के अनुसार 3 माह के भीतर विधि विभाग से अभियोजन की स्वीकृति प्रदान कर दिया जाना चाहिए अन्यथा स्वतः अभियोजन की स्वीकृति मान लिया जाता है।
