कोरिया / आषाढ़ माह के शुक्लपक्ष की द्वितीया तिथि मे अाज जगन्नाथ रथ यात्रा के अवसर पर जिला मुख्यालय बैकुंठपुर और चिरीमिरी में भव्य रथयात्रा निकाली गई। इस मौके पर भव्य रथ में भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र एवं देवी सुभद्रा की मूर्तियों को बैठाकर नगर भ्रमण कराया गया। इस मौके पर स्थानीय जनप्रतिनिधी के साथ ही साथ क्षेत्र के श्रद्धालु अतिशय श्रद्धा के वातावरण में शामिल हुये।
पुरे देश में आज श्री श्री जगन्नाथ भगवान जी की रथ यात्रा निकाली गई है इसी तर्ज पर कोरिया जिले के चिरमिरी श्री श्री जगन्नाथ मंदिर में भी उड़ीसा के पुरी के तरह यहा भी आज रथ यात्रा निकाली गई है। जब से चिरमिरी में श्री श्री जगन्नाथ भगवान के मंदिर का निर्माण हुूआ है तक से रथ यात्रा निकाली जा रहा है। भक्तो के द्वारा श्री श्री जगन्नाथ भगवान की रथ के रस्सी को खिचकर पूरे ष्षहर में घूमाया गया भक्तो की संख्या हजारो में थी, भक्तो का कहना है की आज के दिन श्री श्री जगन्नाथ भगवान अपने मंदिर से निकल कर भक्तो को दर्षन देते है और साथ ही अपने मौसी के घर जाते है। इस तरह से पिछले 34 वर्षो से चिरमिरी में रथ यात्रा निकाली जा रही है। भक्तो का कहना है की इस रथ यात्रा में शामील होने से और रथ को खिचने से जो भी मनोकमना मागते है पूरी होती है। चिरमिरी के जगन्नाथ मंदिर में रथ यात्रा में शामील होने के लिये दूसरे जिले से भी भक्त पहुचते है। इस मौके पर स्थानीय विधायक श्याम बिहारी जायसवाल, निगम महापौर के डोमरू रेड्डी, संजय सिंह, किर्ती वासो, शिव वर्मा, जी डी पोलाई समेत नगर के श्रद्धालुजन उपस्थित रहे। इसी बीच कई सामाजिक लोगो ने श्रद्धापूर्वक से श्रद्धालु को भोग प्रसाद भी वितरण किया।
उल्लेखनीय है कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीय पर प्रतिवर्ष रथ यात्रा महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस मौके पर भी परंपरागत् ढंग से रथ यात्रा का आयोजन किया गया। दोपहर आयोजन समिति के लोग प्रेमाबाग मंदिर परिसर के समीप इकट्ठा हुये। यहां परंपरागत् ढंग से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र एवं देवी सुभद्रा की पूजा अर्चना की गई। दोपहर तीन बजे से प्रेमाबाग स्थित जगन्नाथ मंदिर से भव्य रथयात्रा का शुभारंभ किया गया जहां श्रद्धालु श्रद्धा के साथ रथ के आगे लगे रस्सो को खींचते हुये चल रहे थे। शोभायात्रा जय जयकार और मंगल ध्वनि के बीच नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुये श्री राम मंदिर पहुंची। मंदिर के पुजारी ने बताया कि भगवान का विराजमान होना और प्रतिवर्ष रथयात्रा के माध्यम से दर्शन देना यहां के लोगों के लिए सौभाग्य की बात है। भगवान श्री कृष्ण का ही एक नाम जगन्नाथ देव है। रथयात्रा के अवसर पर श्री जगन्नाथ जी, श्री बलदेवजी और उनकी बहन श्री सुभद्राजी को मंदिर से बाहर लाकर उन्हें रथ बैठाया जाता है। रथयात्रा के इतिहास को लेकर उन्होंने बताया कि एक बार माता जानकी ने बहन सुभद्रा से बताया कि भगवान जगन्नाथ स्वामी सखियों से मिलने सखी रूप में आते हैं। सुभद्रा को इस बात का विश्वास नहीं हुआ और उन्होंने उस रूप को देखने की ठान ली। एक दिन जब भगवान सखी रूप में आए तो वहीं छिपी बहन सुभद्रा ने भगवान के उस स्वरूप को देखकर उन्हें टोक दिया। भगवान रूठकर यात्रा पर निकल गए। बाद में माता जानकी ने भी उसी यात्रा का अनुसरण किया और उनके पड़ाव स्थल पहुंचकर उनकी ध्वज पताका निकाल लाई और रसोई छिन्न भिन्न कर दी। सुबह जब भाई बलभद्र ने देखा कि धर्मपताका नहीं है तो उन्होंने प्रभु से लौटने को कहा क्योंकि उस समय धर्मपताका ही उपस्थिति की प्रतीक थी। इस तरह जगन्नाथपुरी की रथयात्रा की तर्ज पर प्रतिवर्ष यहां भी परंपरा निभाई जा रही है।
इस मौके पर देवरहा समिति के अध्यक्ष शैलेष शिवहरे, वेदांती तिवारी, नपाध्यक्ष अशोक जायसवाल, एम एल सोनी, आशीष शुक्ला, रजनीश गुप्ता, छोटू सिंह, अनुराग दुबे, शेखर सिंह बघेल, रवि सिंह, रामधनी गुप्ता, सुभाष साहू, राहुल मिश्रा, घनश्याम साहू, बबलू जायसवाल, अजय जायसवाल, डबलू सिंह, मल्लू जायसवाल, योगेश शुक्ला आनी, अज्जू नामदेव, महाकाल सेवा समिति, गौ रक्षा समिति समेत नगर के श्रद्धालुजन उपस्थित रहे। श्री राम मंदिर में रथ यात्रा के विसर्जन के बाद भगवान की मूर्तियों को मंदिर में स्थापित किया गया। यहां दस दिनों के विश्राम के बाद पुन: भगवान जगन्नाथ का मंदिर आगमन होगा।
