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सर्प दंश से २ बच्चों की मौत का मामला, दो दिनों बाद आज हुआ पीएम

00 4 – 4 लाख रुपए की सहायता राशी
00 सर्पदंश से दो सगे भाई- बहन की मौत
00 अर्थी में नही डोली में ढोकर 80 किमी दुर लाया गया शव

कोरिया / जिले के दुरस्त ग्रामीण अंचल माने जाने वाले सोनहत – भरतपुर विधानसभा इलाके में स्थित ग्राम झापर में पिछले 15 सितंबर की देर रात खाट पर सो रहे मासूम भाई-बहन को जहरीले सांप ने डस लिया। गांव में अस्पताल व बाहर ले जाने का कोई साधन नहीं होने से उन्होंने दोनों की झाडफ़ूंक करानी शुरू कर दी और इसी बीच अगले सुबह ही दोनों की मौत हो गई। इस पुरे मामले में विडंबना यह रही कि दोनों का शव शुक्रवार व शनिवार को घर में गांव में वाहन पहुंचने के लिए रास्ता नहीं होने से परिजनों द्वारा शनिवार की शाम डोली में शव को पीएम के लिए कोटाडोल अस्पताल तक लाना पड़ा और ग्राम झापर से कोटाडोल की दूरी करीब 80 किमी है।

ये था मामला – 15 सितंबर की रात जीवनलाल का परिवार खाना खाकर सो रहा था। उसकी बेटी लक्ष्मनिया 7 वर्ष व पुत्र रामबाबू 5 वर्ष एक कमरे में खाट पर सो रहे थे। इसी दौरान रात करीब 2 बजे एक जहरीला सांप उनकी खाट पर चढ़ गया और बारी-बारी से दोनों को डस लिया। कुछ काटने का अहसास होने पर भाई-बहन की नींद खुल गई और वे रोने-चिल्लाने लगे। बच्चों की आवाज सुनकर परिजन उठे और शरीर पर निशान देखकर समझ गए कि दोनों को सांप ने डस लिया है। इसके बाद वे तत्काल दोनों को बैगा के पास ले गए। यहां उनका झाडफ़ूंक शुरू किया गया। लेकिन सुबह होते तक दोनों की मौत हो गई। एक साथ 2 मासूम बच्चों की मौत से पूरा परिवार सदमे में आ गया। प्रशासन की ओर से मिलने वाले मुआवजे की आस में उन्हें पीएम कराने के लिए 2 दिन तक शव को घर में ही रखना पड़ा। जब मामला अधिकारियों तक पहुंचा तो 17 सितंबर की शाम डोली में दोनों बच्चों का शव कोटाडोल अस्पताल लाया गया। वहीं 18 सितंबर की सुबह जनकपुर से पहुंचे डॉक्टर ने दोनों का पीएम किया। इसके बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए शव वापस गांव ले गए।

जरा सोचिये आखिर क्यों- न सड़क न अस्पताल प्रदेश के इस अनोखे ग्राम झापर में करीब 80 किमी दूर दुर्गम इलाके से अर्थी की बजाए शव को डोली में रख कर pm कराने के लिए लाया जाता है। क्यों आज भी गांव में अब तक पहुंचने के लिए न ही सड़क बनी है और न ही अस्पताल। बुनियादी सुविधाओं व विकास की आस लिए यहां के लोग आज भी वर्षों से क्यों तरस रहे हैं। यदि गांव या आस-पास कोई अस्पताल होता तो दोनों बच्चों को वहां तत्काल ले जाया गया होता और उनकी जान बच सकती थी।क्यों शासन व प्रशासन के नुमाइंदे केवल मुख्यालय में बैठकर अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। उन्हें इस गांव में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में क्यों कोई दिलचस्पी नहीं है।

सहायता राशी देने का ऐलान – सर्पदन्स से दो बच्चों की मौत के मामले में कलेक्टर एस प्रकाश ने तात्कालिक सहायता के रूप में परिजनों को दस दस हजार रुपए और 4 – 4 लाख रुपए की सहायता राशी देने का ऐलान किया है।

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