Advertisement Carousel

लोकसुराज रही महज औपचारिकता, लोकसुराज अभियान पूरी तरह से विफल, प्रदेश में नाराजगी का वातावरण : भूपेश बघेल

** स्वच्छता अभियान में किये जा रहे निर्माण कार्यो की गुणवत्ता को लेकर प्रदेश में व्यापक शिकायते मिली है, कमीशनखोरी जारी
** बेरोजगारों को नौकरियां नहीं मिल पा रही है, निवास, जाति और आय प्रमाण पत्र बनवाने के लिये युवाओं को घूस देना पड़ता है
** लोकसुराज के नाम पर केवल आवेदन लेने और उनको निराकृत दिखाने की औपचारिकता निभाई गयी है

रायपुर / लोकसुराज अभियान को पूरी तरह से विफल करार देते हुये प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल ने लोक सुराज अभियान को लेकर श्वेत पत्र जारी करने की मांग करते हुये कहा है कि उन्होंने पिछले वर्षो से हो रहे सुराज अभियान पर सवाल खड़े किये है।

रमन सरकार के द्वारा पिछले कई वर्षो से लोक सुराज, ग्राम सुराज, नगर सुराज के नाम से जनता को छला जा रहा है। इस वर्ष लोक सुराज अभियान में 28 लाख 54 हजार 360 आवेदन नागरिकों ने समस्याओं के निराकरण की उम्मीद के साथ सौपे थे। वर्तमान में लोक सुराज अभियान के शिविर में मंदलोर में आवेदन देने आये ग्रामीणो ने शिविर समाप्त होने के बाद शिविर में दिये गये आवेदन की लावारिस हालात में पाया और जमीन में पड़े रजिस्टर को थाने में ले जाकर जमा कराये। जन आशीर्वाद पदयात्रा में निकले विधायको के सामने स्वच्छ छत्तीसगढ़ अभियान में झाडू लेकर फोटो खिचाकर सफाई अभियान चलाने वाले भाजपा के सांसद विधायको की पोल खुल गई है। लोक सुराज अभियान सबसे ज्यादा आवेदन ग्रामीण क्षेत्रों से मिलना रमन सरकार के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। शहरी क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलना, राशन कार्ड, स्वच्छ पेयजल, वृद्धा पेंशन, सहित सरकारी विभाग की भ्रष्टाचार से पीड़ित जनता का आवेदन ज्यादा प्राप्त हुआ, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र बनवाने तक में युवाओं की रिश्वत देना पड़ रहा है। 2005 से सूपेबेड़ा में दूषित पानी के कारण लोग बीमार पड़ रहे है। 2005 में सुराज अभियान के दौरान सूपेबेड़ा की समस्याओं को निराकरण के लिये आये आवेदन पर आज तक कोई कार्यवाही नही हुयी। 2018 लोक सुराज अभियान तक सुपेबेड़ा के लोग वही दूषित पानी पीने मजबूर है। बीमारी से बदस्तूर लोगो की मौत हो रही है। 2012 के लोक सुराज अभियान के दौरान गरियाबंद इलाके में नहर लाइनिंग की शिकायत किया गया था, जिसका निराकरण 2017 तक सरकार नहीं कर पायी।
2015 में लोक सुराज अभियान के तहत लगभग 30 लाख से अधिक आवेदन आये थे। मुख्यमंत्री ने पिछले साल लोक सुराज अभियान के दौरान 187 घोषणायें एवं 243 निर्देश जारी किया गया था, जो धरातल पर कहीं दिखते नहीं है। 2018 में फिर मुख्यमंत्री रमन सिंह ने फिर से वही घोषणा एवं वही निर्देश जारी किया है जो जनता की आंखों में धूल झोकने का काम है। मुख्यमंत्री रमन सिंह के निर्देश पर भाजपा कार्यालय से सांसदो और विधायको की पदयात्रा कार्यक्रम किया गया, जिसका पूरे प्रदेश में व्यापक विरोध हुआ है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने पूछा है कि भाजपा के जनप्रतिनिधि इसके पहले 5 साल में कब जनता के बीच गये थे? आज तक इनको जनता की याद नहीं आयी और आज चुनाव सामने देखकर भाजपा सांसदों और विधायकों की जनता और पदयात्रा की याद आ गयी। भाजपा नेतृत्व के पसीने छूटने लगे, तब जनप्रतिनिधियों को पदयात्राओं की सलाह दी गयी। कांग्रेस ने आंदोलनों और पदयात्राओं के माध्यम से जनता से 5 साल सतत् जीवंत संपर्क रखा है जबकि भाजपा पूरी तरह से सत्ता के मद में मस्त रहीं है। अब चुनाव सामने देख कर भाजपा सांसदों, विधायकों को जनता की याद आई। राज्य में कांग्रेस के पक्ष में जबर्दस्त माहौल से भाजपा का शीर्ष नेतृत्व घबरा गया है। आनन-फानन में बजट सत्र के अंतिम दिन भाजपा सांसदों-विधायकों की बैठक बुलाकर पदयात्राओं का कार्यक्रम कांग्रेस की नकल करते हुये जारी करना पड़ा। भाजपा बतायें कि उसके जनप्रतिनिधी सांसद और विधायक इसके पहले जनता के बीच कब गये थे? चुनाव सामने देखकर भाजपा को जनता की, गरीबों की, मजदूर किसानों की याद आई है अभी तक तो कमीशनखोरी, दलाली और तबादलों की कमाई से ही फुरसत ही नहीं थी। 

error: Content is protected !!