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चुनावी वर्ष में नीति आयोग के सहारे फर्जी अवार्डों की बरसात कर रही रमन सरकार – अमित जोगी ने कई तथ्यों को रख CM रमन को दिखाया आईना

** रमन सरकार द्वारा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दिए जाने और बीमारू राज्य की कमान सँभालने के दावों की तथ्यों के साथ खोली पोल
** प्रदेश में लचर स्वास्थ्य सुविधाओं पर रखे दस तथ्य
** वर्ष 2000 से 2003 तक जोगी शासनकाल में हुए विकास के दिए 5 उद्हारण, पूछा कैसे सौंपा था रमन सिंह को बीमारू राज्य?
** अजीत जोगी जी ने दिसंबर 2003 में रमन सिंह के हाथों में सौंपी मजबूत नींव, इसके बावजूद रमन सरकार 14 वर्षों में उस मजबूत नींव पर महल खड़ा नहीं कर पायी

रायपुर / मरवाही विधायक अमित जोगी ने वर्ष 2003 के पहले प्रदेश को बिमारू राज्य कहे जाने और पिछले 14 वर्षों में रमन सरकार द्वारा प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दिए जाने के दावों पर तथ्यों के साथ तगड़ा पलटवार किया है।

गौरतलब है कि एक समाचार पत्र में यह प्रकाशित हुआ था कि वर्ष 2003 में डॉ रमन सिंह ने बीमारू राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ की कमान संभाली थी और आज छत्तीसगढ़ में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दिए जाने का दावा किया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि नीति आयोग के अनुसार छत्तीसगढ़ अब बीमारू राज्य की श्रेणी से बाहर आ गया है।
इस विषय पर सरकार की पोल खोलते हुए अमित जोगी ने कहा कि हमेशा की भाँति रमन सरकार एक बार फिर झूठ बोलकर वाह वाही लूटने का प्रयास कर रही है। हकीकत यह है कि आज प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग स्वयं आई.सी.यू में है।

जोगी ने कहा की छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं की हकीकत वे इन दस तथ्यों से जनता के सामने रख रहे है….

1. मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (आंबेडकर अस्पताल) रायपुर में नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख ने स्वयं स्वीकारा है कि प्रदेश में 440 डायलिसिस मशीनों की आवश्यकता है। विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री ने भी नवंबर 2016 में मशीनों की कमी को स्वीकारा था। मार्च 2017 में विधानसभा मेंइस पर अशासकीय संकल्प भी पारित हुआ था। लेकिन अभी भी समस्या जस की तस है।
सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस की पर्याप्त सुविधा नहीं होने पर लोगों को प्राइवेट अस्पतालों में डायलिसिस करवाना पड़ता है। एक परिवार को मरीज केजीवनकाल में लगभग 10 लाख रूपए तक खर्च करने पड़ते हैं जो एक सामान्य परिवार के लिए बहुत बड़ी रकम है।
2. स्वास्थ्य मंत्री ने मार्च 2017 में विधानसभा में स्वीकार किया है कि छत्तीसगढ़ में खून की मांग के अनुपात में 60% कम खून उपलब्ध है।
इस स्थिति की गंभीरता इससे समझी जा सकती है कि छत्तीसगढ़ की 10% आबादी सिकल सेल एनीमिया रोग की कॅरिअर है। रमन सरकार एक ही दिन में लाखों लोगों की सिकल सेल जांच करके गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में नाम दर्ज करवा रही है लेकिन सिकल सेल मरीजों के उपचार के लिए क्या कर रही है? रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ सिकल सेल इंस्टिट्यूट में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के अधिकांश पद रिक्त पड़े हैं सिर्फ प्रशासनिक पदों में भर्ती हुई है। यह जानकारी स्वयं स्वास्थ्य मंत्री ने विधानसभा में दी है। आखिर यह कैसा चिकित्सकीय संस्थान है जो बिना डॉक्टरों के संचालित हो रहा है?
3. पिछले कुछ महीनों में प्रदेश में 3184 नवजात बच्चों और 221 माताओं की मृत्यु हुई है। मौतों में नेता प्रतिपक्ष का गृह जिला सरगुजा अव्वल, मुख्यमंत्री का गृह जिला राजनांदगांव तीसरे स्थान पर।
4. शासकीय अस्पतालों में आवश्यक दवाओं का भी टोटा – उलटी दस्त, जुकाम की दवा तक नहीं। मांग होने के बाद भी छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेजकारपोरेशन लिमिटेड समय पर दवाओं की आपूर्ति नहीं कर रहा। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन लिमिटेड में किया जा रहा भारी भ्रष्टाचार आज हम सबकी आँखों के सामने है।
5. गरियाबंद जिले के देवभोग विकासखंड के सूपेबेडा गाँव में किडनी रोग से लगातार लोगों की मौतें हो रही हैं। सरकार अभी तक इसका कारण पता करने मेंनाकाम। स्वास्थ्य मंत्री ने विधानसभा में गलत जवाब दिया कि अस्पताल अभिलेख के अनुसार एक भी मरीज की मौत किडनी रोग से नहीं हुई है। केंद्रीयस्वास्थ्य मंत्री के समक्ष केंद्र द्वारा इस समस्या पर शोध किये जाने का अनुरोध करके अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया।
6. मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (आंबेडकर अस्पताल) रायपुर में अच्छे डॉक्टर होने के बावजूद स्वास्थ्य सुविधाएं एकदम लचर। अंबेडकर अस्पताल रायपुर मेंआलम यह है कि एक बिस्तर पर 2 मरीजों को भी रख दिया जाता है। लेकिन फिर भी बिस्तरों की संख्या बढ़ाने के लिए कुछ नहीं किया जा रहा। अधिकतर यह देखा गया है कि मरीज के परिजनों को वहां स्वयं ही व्हील चेयर और स्ट्रेचर खींचना पड़ता है।
7. डी के एस सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के आरम्भ की तिथि बार बार आगे बढ़ाई जा रही है। सरकार द्वारा हर बार एक नयी तिथि घोषित होती है लेकिन निर्माण कार्य इस कदर पिछड़ चुका है कि वह तिथि आते ही अगली तिथि की घोषणा करनी पड़ती है।
8. बालोद नेत्र कांड, गर्भाशय कांड, नसबंदी काण्ड और ऐसे ही अनेकों काण्ड इस सरकार के तीन कार्यकाल में हुए हैं।
9. मुख्यमंत्री को अस्पताल उद्घाटन करके झूठी वाहवाही बटोरने की इतनी जल्दी रहती है कि बिना स्टाफ की पदस्थापना किये और बिना उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित किये बिलासपुर से ही बैठे बैठे पेंड्रा के मदर और चाइल्ड अस्पताल का उद्घाटन कर दिया।
10. मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा की राशि 30,000 रूपए से बढाकर 50,000 कर सरकार फूली नहीं समां रही है लेकिन सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ वाकई में जरूरतमंदों को मिल रहा है? निजी अस्पतालों द्वारा मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के नाम पर मरीजों का शोषण किये जाने की घटनाएं आम हो गयी हैं जिसका ताजा उद्धारण हाल ही में पखांजूर में घटी घटना है जहाँ रायपुर के एक निजी अस्पताल ने बिना अनुमति के कैंप लगाकर मरीजों को रायपुर लाया गया और स्मार्ट कार्ड से पैसे लेने के लिए उनका जबरदस्ती ऑपरेशन कर दिया गया।

अमित जोगी ने कहा कि यह बेहद दुःख की बात है कि जिस प्रदेश के मुखिया स्वयं एक डॉक्टर हैं वहां पर स्वास्थ्य सुविधाएं इतनी खस्ताहाल हों। मुख्यमंत्री द्वारा एक बीमारू राज्य की कमान हाथ में लिए जाने के दावों को सिरे से नकारते हुए अमित जोगी ने कहा कि वर्ष 2000 से 2003 का समय छत्तीसगढ़ के विकास का स्वर्णिम युग था। नया राज्य था, चुनौतियाँ अत्यधिक थीं लेकिन उन चुनौतियों का डटकर सामना करते हुए प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने अल्प समय में छत्तीसगढ़ को भारत ही नहीं विश्व के नक्शे में पहचान दिलवाई थी।

जोगी शासनकाल में हर वर्ग के विकास के लिए काम किये गए। इसके उन्होंने पांच उद्हारण दिए ……

a) बस्तर के नगरनार में एन.एम.डी.सी के स्टील प्लांट की नींव श्री जोगी द्वारा रखी गयी जिसको आज केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर निजी हाथों में बेचने पर अमादा हैं ।
b) जोगी शासनकाल में उद्योग नीति बनायीं गयी थी जिसमें 90 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार देने का प्रावधान था। इसको रमन सरकार लागू करने में नाकाम रही जिसके परिणाम स्वरुप आज प्रदेश के 20 लाख से ज्यादा युवा बेरोजगार घूम रहे हैं और आत्महत्या जैसे कदम उठाने पर भी विवश हो रहे हैं।
c) यह जोगी सरकार ही थी जिसने डॉ रमन सिंह की पार्टी की तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा इंकार कर दिए जाने के पश्चात लोन लेकर भी किसानों के धान को समर्थन मूल्य पर खरीदा था ।
d) ग्रामीण क्षेत्र में जो आबादी पट्टे जोगी जी के कार्यकाल में बांटे गए उन्ही को रमन सरकार पुनः बाँट कर वाह वही लूटने का प्रयास कर रही है।
e) अजीत जोगी ने प्रदेश को पावर सरप्लस राज्य बनाया लेकिन आज स्थिति यह है की छत्तीसगढ़ पावर सरप्लस से पावर डेफिसिट राज्य बन गया है जिसकी जानकारी स्वयं मुख्यमंत्री ने विधानसभा में दी है। इससे भी ज्यादा चैका देने वाली बात यह है कि जब प्रदेश में स्वयं की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त मात्रा में बिजली उपलब्ध नहीं है तब भी छत्तीसगढ़ द्वारा अन्य राज्यों को बिजली बेचीं जा रही है। क्या मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के लिए छत्तीसगढ़ के हितों से बढ़कर अन्य राज्यों के हित हैं?

अमित जोगी ने कहा कि हकीकत तो यह की मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को अजीत जोगी द्वारा दिसंबर 2003 में एक बहुत ही मजबूत नींव का निर्माण करके दिया गया था। विकास की सभी नीतियां बना कर दी थीं, मुख्यमंत्री को सिर्फ उन्हें सही तरीके से क्रियान्वित करना था। मुख्यमंत्री वह भी करने में असफल रहे हैं जिसका परिणाम यह है कि हमारा प्रदेश विकास में आज पिछड़ गया है। यदि रमन सरकार ने श्री जोगी द्वारा निर्धारित की गयी विकास की नीतियों का सही क्रियान्वन किया होता तो अजीत जोगी जी द्वारा दी गयी मजबूत नींव पर रमन सरकार द्वारा पिछले 14 वर्षों में भव्य महल का निर्माण कर दिया होता।

नीति आयोग द्वारा किये जा रहे दावों पर कटाक्ष करते हुए अमित जोगी ने कहा कि चुनावी वर्ष में अपनी संभावित हार को देखते हुए रमन सरकार बौखला गयी है और नीति आयोग के सहारे फर्जी अवार्डों की बरसात करके छत्तीसगढ़ की जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है। जबकि सच्चाई इससे कोसों दूर है। अब जनता भी सरकार की नाकामियों को भली भाँती समझ चुकी है और आगामी चुनाव में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे को पूर्ण बहुमत देकर अजीत जोगी को मुख्यमंत्री बनाने का निश्चय कर लिया है जिससे हमारा छत्तीसगढ़ एक बार पुनः विकास के मार्ग पर अग्रसर हो सके।

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