कोंडागांव से विजय शर्मा की रिपोर्ट / जनपद पंचायत कोंडागांव अन्तर्गत ग्राम बडे कनेरा की महिलाओं ने गांव के तालाब में मछली पालन कर अपना आर्थिक स्थीती मजबुत करने में लगी है। जैसा समुह का नाम वैसा ही हौसला इन महिलाओं के अन्दर देखने को बनता है। कुछ समय पुर्व तक ये महिलाये अपने अपने घरों में चुल्हा चौका सम्भाल रही थी या दुसरे के खेतों में मजदुरी कर रही थी। मगर अपने हौसले व जिला पंचायत की मदद से आज ये समहु पुरे जिले के लिए गौरव बन चुकी है।
दरअसल समुह में 12 सदस्य है अपने समुह में सभी सदस्य एक वर्ष तक पैसा जमा कर कुछ पुजी बना ली, फिर जिला पंचायत की योजना विहान से लाभ लेकर गांव के ही तालाब में मछली पालन का कार्य शुरू किया था। आज इन महिलाओं को मेहनत करते देख विभागीय अधिकारी ही नही बल्की गांव के परूष भी सोचने को मजबुर हो जाते है की जो कार्य पुरूष भी बडी मुश्किल से करते है उस कार्य को समह की ये महिलाये बडी आसानी से कर लेती है।
मछली की जाल लेकर तालाब उतर जाती है कुछ महिलाऐं तालाब से मछली के साथ जाल खिचती है तेा कुछ मछली पकडकर केरेटों में भरती है और कुछ महिलाए ग्राहाको को ताजी मछली तैालकर बेचती है।

हिसाब किताब बराबर – ऐसा नही है की ये महिलाये केवल मछली पकड कर बेचती है बल्की इसका बराबर हिसाब करने के लिए एक पढीलिखी महिला को रखा है जो बराबर फाईल मेन्टेन करती है। कब कितनी मछली निकाली गई कितान बेचा गया व कितनी राशि आज समुह के पास जमा है और कितना कितना महिलओं में बांटा जायेगा व कितना बैंक में जमा होगा।
प्रशासनिक अधिकारी भी लगातार इस समुह के बीच पुहचकर उनके काम कोई समस्या आ रही है तो उसका निराकरण किया जाता है सीईओं का कहना है की यह समुह जिले के दुसरे समुह के लिए एक मिशाल बन रही है इन महिलाओं को देखकर घर पर बैठी दुसरी महिलाओं में भी समुह बनाने व आत्मनिर्भर बनने का जज्बा तैयार हो रहा है शासन विहान कार्यक्रम के अन्तर्गत समुहों को हर संभव मदद करती है।
पुर्व में दिया गया प्रशिक्षण – समुह को पुर्व में विहान कार्यक्रम के अन्र्तगत जनपद पंचायत में प्रशिक्षण दिया गया अब वे इस कार्य में निपुर्ण हो चुकी है। बल्की इस काम को करने के बाद बताती है की उनकी आमदनी बड रही है पहले घर की स्थीती कमजोर थी कमाने वाले एक थे और खाने वाले अनेक मगर अब हमारे कमाने से घर पर दुसरे खर्च वहन हो जाते है ।
आकडो़ में अगर बात करे तो सरकार की उपलब्धी बताने के लिए यह काफी होगा की वर्ष 2017 और 18 में 800 समुह बनाने का लक्ष्य था। जिसमे 917 समुह तैयार हुये इन समुह को 11 करोड़ 20 लाख का बैंक ऋण देने का सरकार ने लक्ष्य रखा था मगर सरकार के पास मांग ज्यादा पहुची जो 11 करोड़ 42 लाख था जिसे सरकार ने पुरा किया और महिलाओं को सस्ख्त बनाने के लिए हर संभव मदद कर रही है। 2018 और 19 के लक्ष्य में अब तक समुहों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
आज जिले में बनी समुहों द्धारा मछली पालन, मुर्गी पालन, ईट निर्माण, मषाला निर्माण, बीज उत्पादन, खप्पर निर्माण, टेन्ट व साउण्ड व्यवसाय, टेडीटु ईट युनिट, सब्जी उत्पादन, मध्याान भोजन, उचित मुल्य की दुकान, लाख उत्पादन, पापड़, हस्त शिल्प, पोहा एंव मुर्रा कैंटीन, रेडीमेंट कपडे की दुकान, झाडु निार्मण, दोना पत्तल निर्माण, अगरबती मिर्नाण, मषरूम उत्पादन, बांस आर्ट, टैक्सी सेवा, अनाज व्यापार, बढ़ई कार्य, बकरी पालन, कृषि सेवा केन्द्र ,आचार बनाने जैसी व्यवसाय से महिलाये जुड चुकी है और अपना आर्थिक स्थिीती मजबुत कर रही है।
संजय कन्न्रोजे जिला पंचायत सीईओ – महिला समुह का काम देखकर प्रसन््रनता होती है जब भी समय मिलता है तो समुह के कार्यों को देखने उनकी समस्याओं को सुनने पहचते है उन्हे हर संभव मदद करते है व शासन की योजना का लाभ लेने को कहते है आज जिले में 50 हजार महिलाये समुह में जुड चुकी है लगभग।
