चिरिमिरी बीमा घोटाला: कोटेशन का कवच, गाड़ियाँ फर्जी बीमा में सुरक्षित! अब थाने से लेकर PMO तक शिकायत

एमसीबी चिरिमिरी।
नगर पालिक निगम चिरिमिरी में गाड़ियों का बीमा नवीनीकरण किसी बीमा कंपनी ने नहीं, बल्कि कोटेशन की ताकत ने कर दिया। RTI कार्यकर्ता राकेश सिंह ने उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर खुलासा किया कि निगम की करीब 45–50 गाड़ियों का बीमा नवीनीकरण पिछले चार सालों से लगातार फर्जी दस्तावेजों के जरिए दिखाया जा रहा था।

कैसे हुआ खेल?

13 जनवरी 2023 को निविदा क्र. 4512 के तहत बीमा नवीनीकरण का टेंडर निकला। अनुमानित राशि थी 9 लाख रुपये। टेंडर मिला मंजिता ई-सोल्यूशन नामक फर्म को। पर बीमा पॉलिसी की जगह निगम को दिए गए कागजों में न पॉलिसी नंबर था, न कंपनी का नाम, न असली बारकोड। यानी गाड़ियाँ कागज़ पर तो बीमित थीं, मगर सड़क पर बेपर्दा दौड़ रही थीं।

मिलीभगत का सवाल

राकेश सिंह का कहना है: “निगम के अधिकारी पढ़े-लिखे हैं, वो पॉलिसी और कोटेशन का फर्क न समझ पाएं, यह मानना मुश्किल है। बिना मिलीभगत के ठेकेदार अकेला इतना बड़ा घोटाला नहीं कर सकता।” अब वे इस मामले को स्थानीय पोड़ी थाने से लेकर PMO तक से शिकायत कर चुके हैं अब अगला कदम प्रशासन के विरुद्ध धरना देने और फिर न्यायालय के माध्यम से न्याय पाने का हैं।

शिकायतों का ढेर, कार्रवाई शून्य

आरटीआई कार्यकर्ता ने दस्तावेजों के साथ पहले निगम कार्यालय में शिकायत की। फिर महापौर रामनरेश राय और आयुक्त को पत्र भेजा। महापौर ने जांच के आदेश दिए, पर फाइलें चाय की प्याली के नीचे दबकर महीनों से आराम फरमा रही हैं।
जिला कलेक्टर को भी शिकायत भेजी गई, लेकिन वहां भी तीन महीने में न जांच हुई, न कार्रवाई।

दिल्ली तक पहुँची गूँज

हारकर राकेश सिंह ने FIR के लिए स्थानीय पौड़ी थाने का दरवाज़ा खटखटाया और मामला अब PMO तक पहुँच गया है। शिकायत में मांग की गई है कि फर्जी बीमा दस्तावेज़ों से हुए भुगतान की वसूली की जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो।

महापौर की सफाई

महापौर रामनरेश राय ने कहा: “हम दोषियों को बख्शेंगे नहीं। जांच कर दूध का दूध, पानी का पानी किया जाएगा।”

जनता का सवाल

जनता अब पूछ रही है—
क्या निगम की गाड़ियाँ सचमुच सड़क पर सुरक्षित थीं, या फिर सिर्फ़ कागज़ पर ‘इंश्योर्ड’ थीं? और क्या कार्रवाई भी सिर्फ़ कागज़ों पर ही होगी?

मंजिता ई-सोल्यूशन ने सही नही की सोल्यूशन

मंजिता ई-सोल्यूशन नामक फर्म ने इस बड़े घोटाले को निगम के अधिकारियों के साथ मिल कर अंजाम दिया। खुद भी गलत कृत्य कर पैसे बनाए और जमकर निगम अधिकारियों को पैसे खिलाए तभी इस बड़े घोटाले की जांच को अब तक आंच नही लग पाया हैं।

error: Content is protected !!