रायपुर/बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ की सियासत में आदिवासी नेतृत्व और उनके सम्मान को लेकर नई बहस छिड़ गई है। बिलासपुर में कांग्रेस के “वोट चोर गद्दी छोड़” कार्यक्रम के दौरान उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब पूर्व मंत्री और वरिष्ठ आदिवासी नेता अमरजीत भगत से संबोधन के दौरान प्रदेश प्रभारी सचिव विजय जांगिड़ ने माइक छीन लिया। मंच पर हुई इस हरकत ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और आदिवासी नेताओं के प्रति पार्टी के रवैये पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमरजीत भगत बोले– भाजपा सम्मान समारोह करे
घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए अमरजीत भगत ने कहा— “जैसा दिखता है वैसा होता नहीं है… लेकिन कुछ नेताओं को छत्तीसगढ़ की संस्कृति और आदिवासी भावनाओं का ख्याल नहीं होता। भाजपा वाले इस घटना को ट्रोल कर रहे हैं तो उन्हें मेरे लिए सम्मान समारोह करना चाहिए।”
भाजपा ने साधा निशाना
इस घटना को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर करारा हमला बोला है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि “कांग्रेस हार से बौखलाई हुई है और उल-जुलूल हरकतें कर रही है। कांग्रेस के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है।”
वहीं कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने कहा— “कांग्रेस में आदिवासी नेताओं का कोई स्थान नहीं है। अमरजीत भगत का मंच पर अपमान पूरे आदिवासी समाज और खासकर सरगुजा के लोगों के लिए एक संकेत है।”
कांग्रेस की सफाई– बीजेपी भयभीत
दूसरी ओर कांग्रेस ने मामले को हल्का करने की कोशिश की। प्रभारी सचिव विजय जांगिड़ ने कहा कि “बीजेपी कल के कार्यक्रम से भयभीत है।” वहीं प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने पलटवार करते हुए कहा— “बीजेपी को सरसों का दाना भी मिसाइल लगता है। राहुल गांधी अभी हाइड्रोजन बम फोड़ने वाले हैं।”
पार्टी में खींचतान हुई उजागर
कांग्रेस में हाल के दिनों से लगातार बयानबाज़ी और असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। चाहे पूर्व मंत्री रविंद्र चौबे हों या नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत—हर बार पार्टी को सफाई देनी पड़ रही है। अब अमरजीत भगत के मंचीय अपमान से यह सवाल और गहरा गया है कि क्या कांग्रेस वाकई आदिवासी नेतृत्व के सम्मान को लेकर गंभीर है या फिर आंतरिक खींचतान इस कदर हावी है कि बड़े चेहरे भी उपेक्षित हो रहे हैं।
चुनावी समीकरणों में बड़ा असर
छत्तीसगढ़ की राजनीति में आदिवासी नेताओं की भूमिका हमेशा से अहम रही है। बस्तर और सरगुजा संभाग से आने वाले नेताओं का चुनावी गणित में बड़ा महत्व है। ऐसे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता से माइक छीने जाने की घटना को भाजपा ने आदिवासी अपमान का मुद्दा बनाकर हवा दे दी है। आने वाले दिनों में यह मामला कितना बड़ा सियासी रंग लेगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
