रायपुर।
रायपुर के पूर्व महापौर एजाज़ ढेबर ने प्रदेश के पहले म्युनिसिपल बॉन्ड को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मंगलवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में ढेबर ने कहा कि भाजपा सरकार ने नगर निगम के बॉन्ड पर ऐसी “गैर-जिम्मेदाराना शर्तें” जोड़ी हैं, जिनसे बॉन्ड की साख और निवेशकों का भरोसा दोनों कमजोर हुए हैं।
इस अवसर पर उनके साथ पूर्व एमआईसी सदस्य अजीत कुकरेजा, कुमार मेनन, सुंदर जोगी और राधेश्याम विभार भी मौजूद रहे।
ढेबर ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान जब रायपुर नगर निगम ने बॉन्ड जारी करने की पहल की थी, तब यह जनहितकारी और भविष्यदर्शी कदम था। उस समय राज्य सरकार ने नगर निगम को बिना किसी शर्त के पूरा समर्थन दिया था ताकि नगर निगम वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बन सके।
“हमने बॉन्ड को वित्तीय आत्मनिर्भरता के मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया था। लेकिन वर्तमान सरकार ने जो नई शर्तें जोड़ी हैं, उनसे न केवल नगर निगम की साख पर प्रश्नचिन्ह लगा है बल्कि निवेशकों का भरोसा भी डगमगाएगा,”
— एजाज़ ढेबर, पूर्व महापौर रायपुर
पूर्व महापौर ने सवाल उठाया कि जब स्वयं राज्य सरकार इस बॉन्ड को लेकर ‘जोखिम-मुक्त’ समर्थन देने से पीछे हट रही है, तो आम निवेशक भरोसा कैसे करेगा? उन्होंने यह भी पूछा कि बॉन्ड पर मिलने वाली ब्याज राशि कर-मुक्त रहेगी या नहीं — इस पर सरकार को स्पष्ट करना चाहिए।
ढेबर ने इस दौरान वर्तमान महापौर मिनल चौबे पर भी कटाक्ष किया।
उन्होंने कहा —
“जब हमारी सरकार ने इस बॉन्ड को सामान्य सभा में रखा था, तब आपने उसकी साख पर सवाल उठाए थे। आज आपकी ही सरकार ने आप पर भरोसा नहीं किया — यह बताता है कि मुद्दा राजनीति नहीं, भरोसे का था।”
पूर्व महापौर ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के आने के बाद से रायपुर नगर निगम के कई महत्वाकांक्षी विकास प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चले गए हैं, और शासन बिना ठोस रणनीति के काम कर रहा है।
